मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने पेंशनर्स दिवस के अवसर पर आज बिलासपुर जिला के घुमारवीं में हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त मोर्चा द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह दिवस केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि उन सेवाओं, त्याग और समर्पण को नमन करने का अवसर है, जिनके बल पर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था सशक्त बनी हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पेंशनरों ने अपने सेवाकाल में ईमानदारी और निष्ठा से कार्य कर प्रदेश की नींव को मजबूत किया है। वर्तमान प्रदेश सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सत्ता संभालते ही पहली कैबिनेट बैठक में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बहाल किया गया, जिससे प्रदेश के 1.36 लाख कर्मचारियों को सुरक्षा और सम्मान मिला।
उन्होंने बताया कि 75 वर्ष या उससे अधिक आयु के पेंशनरों को उनके एरियर का 80 प्रतिशत, 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग को 70 प्रतिशत, 65 से 70 वर्ष आयु वर्ग को 38 प्रतिशत तथा 65 वर्ष से कम आयु के पेंशनरों को 35 प्रतिशत एरियर का भुगतान किया जा चुका है। अब तक कर्मचारियों और पेंशनरों के एरियर पर 2155 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2021 तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ग्रेच्युटी एरियर का 20 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है, जबकि शेष राशि चरणबद्ध तरीके से अदा की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि पेंशनरों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों का भुगतान 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पेंशन लाभ देने के लिए पांच वर्ष की दैनिक सेवा के बदले एक वर्ष की क्वालिफाइंग सर्विस का लाभ प्रदान किया है। राज्य की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने पर कर्मचारियों और पेंशनरों की सभी देनदारियों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। इस अवसर पर नगर एवं ग्राम नियोजन व तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, पेंशनर्स संयुक्त मोर्चा के राज्य अध्यक्ष आत्मा राम शर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में पेंशनर्स संयुक्त मोर्चा की मंडी शाखा द्वारा मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए एक लाख रुपये का चेक भी भेंट किया गया।
