मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज प्रदेश सचिवालय शिमला से पुलिस विभाग के 18 अत्याधुनिक एंटी-चिट्टा एवं पैट्रोल वाहनों को झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल प्रदेश सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत पुलिस बल को नवीनतम तकनीक, संसाधनों और आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है।
इन वाहनों में 12 एंटी-चिट्टा वाहन, चार एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग वाहन तथा बचाव अभियानों के लिए दो एंबुलेंस शामिल हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदेश सरकार पुलिस विभाग को स्मार्ट उपकरणों, आधुनिक वाहनों, डिजिटल निगरानी प्रणाली और उन्नत संचार साधनों से सशक्त बना रही है, ताकि अपराध पर त्वरित नियंत्रण और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि ये नए एंटी-चिट्टा वाहन न केवल नशा तस्करी की रोकथाम में सहायक होंगे, बल्कि गश्त, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को भी बढ़ाएंगे। इन वाहनों में आधुनिक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं, जिससे पुलिस की कार्यकुशलता और पहुंच में उल्लेखनीय सुधार होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य तकनीक-सक्षम, उत्तरदायी और जन-हितैषी पुलिस व्यवस्था स्थापित करना है। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से पुलिस आधुनिकीकरण, प्रशिक्षण और संसाधनों के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश पुलिस ने नशे के बड़े नेटवर्क तोड़े हैं, करोड़ों रुपये की अवैध संपत्तियां जब्त की हैं और तस्करों के पूरे इको-सिस्टम पर एनडीपीएस एक्ट व पीआईटी-एनडीपीएस जैसे कड़े कानूनों के तहत निर्णायक कार्रवाई की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस बल के मनोबल और करियर प्रगति पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है। पिछले वर्ष 274 कांस्टेबल, 98 इंस्पेक्टर, 225 सब-इंस्पेक्टर और 225 असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर पदोन्नत किए गए, जबकि अन्य कैडर में 95 कर्मियों और ड्राइवर कैडर में 31 पदोन्नतियां की गईं।
उन्होंने बताया कि सीसीटीएनएस में हिमाचल प्रदेश ने पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में पहला स्थान हासिल किया है, जबकि आईसीजेएस और यौन अपराध जांच निगरानी प्रणाली आईटीएसएसओ में भी राज्य का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है।
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी सहित पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।