छत्रैल में पशुपालकों के लिए जागरूकता शिविर आयोजित

rakesh nandan

19/03/2026

पशु पालन विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को जागरूक करने के उद्देश्य से वीरवार को टौणी देवी के निकटवर्ती गांव छत्रैल में एक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर में पशु चिकित्सालय टौणी देवी के विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों ने भाग लिया और स्थानीय पशुपालकों को पशुओं के स्वास्थ्य, टीकाकरण और देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।

खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव पर जोर

इस अवसर पर डॉ. विश्वदीप राठौर ने बताया कि पशुओं में फैलने वाले खुरपका और मुंहपका रोग (FMD) से बचाव के लिए टीकाकरण का सातवां चरण शुरू कर दिया गया है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि वे अपने गौवंशीय और भैंसवंशीय पशुओं को समय पर नजदीकी पशु चिकित्सालय में टीके अवश्य लगवाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस रोग से बचाव के लिए पशुओं को वर्ष में दो बार, लगभग 6 माह के अंतराल पर टीकाकरण करवाना बेहद आवश्यक है।

टीकाकरण और स्वच्छता दोनों जरूरी

डॉ. राठौर ने बताया कि पशुओं की नियमित सफाई और स्वच्छता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है जितना कि टीकाकरण। उन्होंने कहा कि यदि कोई पशु बीमार हो जाए तो उसे तुरंत अन्य पशुओं से अलग रखें और पशु चिकित्सक से संपर्क करें। उन्होंने बताया कि पहला टीकाकरण पशु के 3 से 4 माह की आयु में करवाना चाहिए। इसके बाद नियमित अंतराल पर टीके लगवाने चाहिए, ताकि रोग से पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

रोग फैलने के कारण और लक्षण

विशेषज्ञों ने बताया कि खुरपका-मुंहपका रोग संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने, गंदे पानी या बर्तनों के उपयोग तथा दूषित चारे के कारण फैलता है।

इस रोग के प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:

  • तेज बुखार

  • अत्यधिक लार निकलना

  • सुस्ती और कमजोरी

  • मुंह और पैरों में फफोले

उन्होंने कहा कि जैसे ही ये लक्षण दिखाई दें, तुरंत उपचार करवाना चाहिए ताकि अन्य पशुओं में संक्रमण फैलने से रोका जा सके।

टीकाकरण से पहले जरूरी सावधानियां

डॉ. राठौर ने पशुपालकों को बताया कि टीकाकरण से लगभग 15 दिन पहले पशुओं की डी-वार्मिंग (कृमिनाशन) करवाना जरूरी है। इसके साथ ही पशु का पंजीकरण करवाना भी आवश्यक है। उन्होंने यह भी सलाह दी कि टीकाकरण के दिन पशु को ज्यादा थकाएं नहीं और उसे साफ-सुथरे वातावरण में रखें।

संतुलित आहार की जानकारी

शिविर के दौरान पशुओं के संतुलित आहार पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। पशुपालकों को बताया गया कि उचित पोषण पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा विभाग की विभिन्न योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई और पशुपालकों से इन योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया गया।

स्थानीय सहभागिता और धन्यवाद

इस अवसर पर ग्राम पंचायत बारीं के पूर्व प्रधान रविंद्र ठाकुर ने पशु चिकित्सकों और उपस्थित ग्रामीणों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि ऐसे जागरूकता शिविर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बड़ी संख्या में ग्रामीण हुए शामिल

शिविर में विभाग के एएचए यशवंत सिंह, फार्मासिस्ट सुभाष रिंकू, स्थानीय निवासी मस्त राम, राकेश चंद, प्रकाश चंद, सुभाष चंद, बलबीर सिंह, देश राज, रमेश चंद, सुरेश कुमार तथा महिला मंडल की प्रधान मनोरमा देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

निष्कर्ष

छत्रैल में आयोजित यह जागरूकता शिविर पशुपालकों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हुआ। इससे न केवल उन्हें पशुओं की बीमारियों और उनके बचाव के बारे में जानकारी मिली, बल्कि बेहतर पशुपालन के लिए आवश्यक वैज्ञानिक तरीकों से भी अवगत कराया गया। इस तरह के शिविर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।