हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पर भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजयुमो प्रदेशाध्यक्ष सनी शुक्ला ने इस बजट को प्रदेश के शिक्षित युवाओं और औद्योगिक विकास के लिए “अपेक्षाओं के विपरीत” करार देते हुए कहा कि यह केवल आंकड़ों का मायाजाल है, जिसमें जमीनी स्तर पर रोजगार और उद्योगों के लिए कोई ठोस योजना नहीं दिखाई देती।
सनी शुक्ला ने कहा कि बजट में प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों—बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (BBN), काला अंब, पांवटा साहिब और ऊना—को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन इनके विकास और विस्तार के लिए बजट में कोई विशेष प्रोत्साहन या नीति नहीं दी गई है।
सरकारी नौकरियों पर संकट
सरकारी रोजगार के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि हमीरपुर चयन आयोग के भंग होने के बाद प्रदेश में भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। हजारों पद रिक्त होने के बावजूद सरकार ने इन्हें भरने के लिए कोई स्पष्ट समयसीमा या रोडमैप पेश नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि लाखों युवा वर्षों से भर्ती परीक्षाओं और परिणामों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे युवाओं में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। सनी शुक्ला ने स्पष्ट कहा कि बिना नई भर्तियों के युवाओं का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।
औद्योगिक विकास पर असर
उन्होंने बजट के आकार में आई कमी को भी गंभीर बताया। उनके अनुसार, पिछले वर्ष का बजट ₹58,514 करोड़ था, जिसे इस वर्ष घटाकर ₹54,928 करोड़ कर दिया गया है। इस प्रकार लगभग ₹3,500 करोड़ की कमी सीधे तौर पर विकास और औद्योगिक ढांचे को प्रभावित करेगी।
उन्होंने कहा कि निवेश के लिए अनुकूल माहौल नहीं होने के कारण नए उद्योग राज्य में आने से बच रहे हैं। इससे रोजगार के अवसर भी कम हो रहे हैं और प्रदेश की आर्थिक प्रगति प्रभावित हो रही है।
बेरोजगारी और कौशल विकास पर सवाल
सनी शुक्ला ने पीएलएफएस (PLFS) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर लगभग 29.9% तक पहुंच गई है, जो बेहद चिंताजनक है। इसके बावजूद सरकार ने बजट में कौशल विकास या रोजगार सृजन के लिए कोई प्रभावी योजना प्रस्तुत नहीं की।
उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं को निजी क्षेत्र में प्राथमिकता देने या उनके कौशल उन्नयन के लिए आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का भी कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। सरकार “ग्रीन इकोनॉमी” जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों की बात तो कर रही है, लेकिन वर्तमान बेरोजगारी संकट का समाधान नहीं दे पा रही।
लोकतांत्रिक विरोध की चेतावनी
भाजयुमो ने सरकार से मांग की है कि वह औद्योगिक क्षेत्रों के लिए विशेष रोजगार पैकेज की घोषणा करे और लंबित परीक्षा परिणामों को जल्द जारी करे। इसके साथ ही सरकारी पदों पर भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र शुरू करने की भी मांग की गई है।
सनी शुक्ला ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इन मांगों पर ध्यान नहीं देती, तो भाजयुमो प्रदेशभर में युवाओं के हितों के लिए आंदोलन शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि संगठन लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेगा और युवाओं की आवाज को बुलंद करेगा।
अंत में उन्होंने कहा कि यह बजट न तो युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरता है और न ही औद्योगिक विकास की दिशा में कोई स्पष्ट रोडमैप देता है। यह केवल घोषणाओं तक सीमित है, जबकि प्रदेश का युवा रोजगार और अवसरों की तलाश में भटक रहा है।