प्रवेश शुल्क वृद्धि पर भाजपा का तीखा हमला

rakesh nandan

20/02/2026

1 अप्रैल 2026 से नए प्रवेश शुल्क पर सियासत तेज

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2026 से लागू किए जा रहे नए प्रवेश शुल्क और फास्टैग आधारित वसूली तंत्र को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए Karn Nanda, भाजपा प्रदेश मीडिया संयोजक, ने सरकार के निर्णय को प्रदेश की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और आम जनता पर सीधा आर्थिक प्रहार बताया।


शुल्क में कितनी वृद्धि?

कर्ण नंदा ने कहा कि:

  • दूसरे राज्यों के निजी वाहनों का प्रवेश शुल्क ₹70 से बढ़ाकर ₹130 कर दिया गया है।

  • छोटे मालवाहक वाहनों पर ₹170 तक शुल्क लगाया गया है।

उन्होंने कहा कि यह वृद्धि सीधे तौर पर जनता और व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाली है।


स्थानीय वाहनों को भी नहीं राहत

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि प्रदेश के अपने मालवाहक वाहनों को भी अब छूट समाप्त कर शुल्क के दायरे में लाया जा रहा है। उनके अनुसार यह निर्णय स्थानीय व्यापार और परिवहन क्षेत्र के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।


बड़े वाहनों पर प्रभाव

उन्होंने कहा कि बड़े मालवाहक वाहन, निर्माण मशीनरी, मिनी बसें और अन्य व्यावसायिक वाहनों पर शुल्क में भारी वृद्धि से वस्तुओं की ढुलाई लागत बढ़ेगी। परिणामस्वरूप बाजार में वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं और इसका सीधा असर आम नागरिक पर महंगाई के रूप में पड़ेगा।


55 टोल बैरियर और ₹185 करोड़ लक्ष्य

कर्ण नंदा ने दावा किया कि प्रदेश में 55 टोल बैरियरों से सरकार ने लगभग ₹185 करोड़ राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि सरकार का उद्देश्य सुविधा प्रदान करना नहीं, बल्कि अधिकतम राजस्व संग्रह करना है।


पर्यटन पर संभावित असर

हिमाचल प्रदेश पर्यटन आधारित राज्य है। भाजपा नेता ने कहा कि प्रवेश शुल्क में वृद्धि ऐसे समय में की जा रही है जब पर्यटन को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। उन्होंने इसे “अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारना” करार दिया और कहा कि इससे पर्यटकों की संख्या पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।


सरकार पर आरोप

कर्ण नंदा ने आरोप लगाया कि सरकार आत्मनिर्भर हिमाचल का नारा देती है, लेकिन उसकी नीतियां उद्योग, पर्यटन और परिवहन क्षेत्र को कमजोर कर रही हैं। उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों के लिए यह निर्णय गंभीर चुनौती बन सकता है।


चेतावनी और राजनीतिक प्रतिक्रिया

भाजपा नेता ने चेतावनी दी कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो इसका असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के हितों की आवाज उठाती रहेगी और सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करना चाहिए।


निष्कर्ष

1 अप्रैल 2026 से लागू होने जा रहे नए प्रवेश शुल्क और फास्टैग आधारित वसूली तंत्र को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।जहां सरकार इसे राजस्व सुदृढ़ीकरण का कदम बता रही है, वहीं भाजपा इसे जनविरोधी निर्णय करार दे रही है। अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच चल रही यह सियासी जंग किस दिशा में आगे बढ़ती है।