हिमाचल प्रदेश में भाजपा ने प्रदेश सरकार के दो महत्वपूर्ण निर्णयों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराते हुए राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है। भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल लोक भवन, शिमला में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता से मिला और उन्हें विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
इस प्रतिनिधिमंडल में भाजपा प्रदेश महामंत्री संजीव कटवाल, मीडिया प्रभारी कर्ण नंदा, कोषाध्यक्ष कमल सूद, सह मीडिया प्रभारी रमा ठाकुर और प्यार सिंह कंवर शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को दो प्रमुख मुद्दों से अवगत कराया, जिन्हें उन्होंने जनविरोधी बताया।
पहला मुद्दा शिमला स्थित कमला नेहरू अस्पताल की गायनी सेवाओं को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव से जुड़ा है। भाजपा नेताओं ने कहा कि यह निर्णय अव्यवहारिक है और इससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि कमला नेहरू अस्पताल पिछले लगभग 100 वर्षों से महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र रहा है। ऐसे में बिना स्पष्ट अधिसूचना के “साइलेंट शिफ्टिंग” के माध्यम से इसकी सेवाओं को कम करना चिंता का विषय है।
भाजपा का कहना है कि IGMC पहले से ही अपनी क्षमता से अधिक भार झेल रहा है। ऐसे में लगभग 300 बेड वाले विशेष अस्पताल की सेवाओं को वहां स्थानांतरित करना न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा, भाजपा ने यह भी मुद्दा उठाया कि कमला नेहरू अस्पताल के उन्नयन पर 20 करोड़ रुपये से अधिक का सार्वजनिक धन खर्च किया गया है। ऐसे में इस निर्णय से यह निवेश व्यर्थ हो सकता है। पार्टी ने यह भी आशंका जताई कि अस्पताल की भूमि का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
दूसरा प्रमुख मुद्दा शिमला शहर में प्रतिबंधित और बंधित सड़कों पर पास शुल्क में की गई भारी वृद्धि का है। भाजपा ने इस निर्णय को भी जनविरोधी बताते हुए कहा कि इससे आम जनता, व्यापारियों और कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
प्रस्तावित संशोधन के तहत प्रोसेसिंग फीस को ₹100 से बढ़ाकर ₹500, पास शुल्क को ₹2,000 से बढ़ाकर ₹10,000 किया जा रहा है। इसके अलावा अन्य शुल्कों में भी वृद्धि प्रस्तावित है, जिससे लोगों में असंतोष का माहौल बन रहा है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि यह निर्णय राजस्व बढ़ाने का माध्यम बन गया है और इससे जनता में भय और नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारी जुर्माने और कारावास जैसे कठोर प्रावधान लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि इन दोनों मुद्दों पर संज्ञान लिया जाए और राज्य सरकार को निर्देश दिए जाएं कि कमला नेहरू अस्पताल की सेवाएं यथावत रखी जाएं तथा पास शुल्क में की गई वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
अंत में भाजपा नेताओं ने कहा कि यदि इन मुद्दों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो पार्टी जनआंदोलन को और तेज करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा जनता के हितों के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी।
कुल मिलाकर, यह मामला हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं और आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर करता है, जिन पर आने वाले समय में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गहन चर्चा होने की संभावना है।