भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव के तबादले को लेकर उत्पन्न विवाद पर प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार इतनी असुरक्षित और असहज हो चुकी है कि अब उसे लोकतांत्रिक संस्थाओं से भी डर लगने लगा है। राकेश जमवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार पंचायती राज चुनावों से डर रही है और उन्हें रोकने के लिए तानाशाही रवैया अपना रही है। संवैधानिक संस्था राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यों में सीधा हस्तक्षेप कर सरकार उसकी निष्पक्षता को प्रभावित करना चाहती है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।
उन्होंने कहा कि आयोग के अनुभवी सचिव सुरजीत राठौर को बिना ठोस कारण हटाने का प्रयास और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारी को आयोग पर थोपने की कोशिश यह साबित करती है कि सरकार का इरादा साफ नहीं है। मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारी को आयोग का सचिव बनाना आयोग की स्वायत्तता पर सीधा हमला है। भाजपा मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि आयोग द्वारा मुख्य सचिव को पत्र लिखकर स्वतंत्र सचिव की मांग करना स्वयं इस बात का प्रमाण है कि सरकार का रवैया पक्षपातपूर्ण और लोकतंत्र विरोधी है। सरकार राजनीतिक दबाव के जरिए चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करना चाहती है ताकि पंचायत स्तर पर अपनी विफलताओं से बचा जा सके।
राकेश जमवाल ने कहा कि यह भी गंभीर चिंता का विषय है कि पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल जनवरी में समाप्त हो रहा है और सरकार पुनर्सीमांकन व मतदाता सूची का बहाना बनाकर चुनाव प्रक्रिया को अप्रैल तक टालने की रणनीति बना रही है, ताकि प्रशासकों के सहारे पंचायतों पर नियंत्रण रखा जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग का अदालत का दरवाजा खटखटाना इस बात का संकेत है कि मामला कितना गंभीर हो चुका है। भाजपा ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने आयोग की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बंद नहीं किया और समय पर निष्पक्ष चुनाव नहीं कराए, तो पार्टी सड़कों से लेकर न्यायालय तक लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी।