परमिट फीस बढ़ोतरी पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला

rakesh nandan

01/04/2026

Karan Nanda ने हिमाचल प्रदेश में परमिट फीस में भारी बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में महंगाई लगातार बढ़ रही है, जबकि जनता को किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिल रही है।

कर्ण नंदा ने विशेष रूप से Shimla जैसे पर्यटन प्रधान शहर में प्रतिबंधित सड़कों के लिए परमिट शुल्क में की गई बढ़ोतरी को अव्यवहारिक और जनविरोधी बताया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से आम लोगों, व्यापारियों और स्थानीय निवासियों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि सरकार ने परमिट से जुड़े लगभग सभी शुल्कों में कई गुना वृद्धि की है। उनके अनुसार, परमिट जारी करने की फीस को ₹2,000 से बढ़ाकर ₹10,000 कर दिया गया है, जो पांच गुना वृद्धि है। इसी तरह प्रोसेसिंग फीस ₹100 से बढ़ाकर ₹500, अस्थायी पास शुल्क ₹200 से बढ़ाकर ₹1,000 और प्रतिदिन शुल्क ₹100 से बढ़ाकर ₹500 कर दिया गया है।

इसके अलावा, बिना परमिट वाहन चलाने पर जुर्माने में भी भारी वृद्धि की गई है। पहले जहां यह जुर्माना ₹3,000 तक सीमित था, अब इसे बढ़ाकर ₹10,000 तक कर दिया गया है। साथ ही 15 दिन तक की सजा का प्रावधान भी जोड़ा गया है, जिसे भाजपा ने कठोर और अव्यवहारिक बताया है।

कर्ण नंदा ने कहा कि यह निर्णय दर्शाता है कि कांग्रेस सरकार को जमीनी हकीकत से कोई सरोकार नहीं है और वह केवल राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से ऐसे फैसले ले रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालकर अपनी वित्तीय चुनौतियों को छिपाने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि पहले ही प्रदेश के लोग पेट्रोल-डीजल पर बढ़े हुए सेस, टैक्स और महंगाई के बोझ से जूझ रहे हैं। ऐसे में परमिट शुल्क में भारी वृद्धि करना आम लोगों के लिए और अधिक परेशानी का कारण बन रहा है।

भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार लगातार ऐसे फैसले ले रही है, जिससे आम आदमी का जीवन कठिन होता जा रहा है। हर स्तर पर शुल्क और करों में वृद्धि से जनता की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

कर्ण नंदा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने इस फैसले को वापस नहीं लिया, तो भाजपा इस मुद्दे को सड़कों से लेकर सदन तक जोरदार तरीके से उठाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी जनता के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है, क्योंकि इससे सीधे तौर पर आम जनता और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है।

कुल मिलाकर, परमिट फीस में बढ़ोतरी को लेकर शुरू हुआ यह विवाद प्रदेश की राजनीति में एक अहम मुद्दा बनता जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या इस निर्णय में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।