जिला बिलासपुर में किशोरियों के स्वास्थ्य संरक्षण और सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा ह्यूमन पेपीलोमा वायरस (एचपीवी) के खिलाफ विशेष टीकाकरण अभियान 29 मार्च 2026 से शुरू किया जा रहा है। यह अभियान 5 अप्रैल और 12 अप्रैल को भी जारी रहेगा, जिससे अधिक से अधिक पात्र किशोरियों को टीकाकरण का लाभ मिल सके।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशी दत्त शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अभियान के तहत जिले के चार चिकित्सा खंडों में कुल 30 स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की 2735 किशोरियों का टीकाकरण किया जाएगा। इस अभियान के लिए विशेष रूप से उन किशोरियों को चिन्हित किया गया है जिनकी जन्म तिथि 28 फरवरी 2011 से 24 मई 2012 के बीच है।
उन्होंने बताया कि अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। इसके लिए विभिन्न विभागों का सहयोग लिया गया है और टीकाकरण केंद्रों को पूरी तरह से तैयार किया गया है।
घुमारवीं चिकित्सा खंड में 4 कोल्ड चेन प्वाइंट स्थापित किए गए हैं, जिनमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भराड़ी, सिविल अस्पताल घुमारवीं, सीएचसी हरलोग और सीएचसी कुठेड़ा शामिल हैं। झंडुता चिकित्सा खंड में कुल 9 कोल्ड चेन प्वाइंट बनाए गए हैं, जिनमें सिविल अस्पताल बरठीं, सीएचसी तलाई, झंडुता तथा विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं।
इसी प्रकार चिकित्सा खंड मारकंड में 10 कोल्ड चेन प्वाइंट बनाए गए हैं, जिनमें क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर, सीएचसी पंजगाई, सिविल अस्पताल मारकंड तथा कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। वहीं श्री नैना देवी जी चिकित्सा खंड में 7 कोल्ड चेन प्वाइंट स्थापित किए गए हैं, जिनमें सिविल अस्पताल घवांडल, सीएचसी स्वारघाट तथा अन्य स्वास्थ्य संस्थान शामिल हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि ह्यूमन पेपीलोमा वायरस (एचपीवी) एक सामान्य संक्रमण है, जो महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण बनता है। विश्व स्तर पर यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है और भारत में भी महिलाओं में यह दूसरा सबसे आम कैंसर है। ऐसे में समय पर टीकाकरण, सुरक्षित जीवनशैली और नियमित जांच के माध्यम से इस बीमारी से बचाव संभव है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीकाकरण खाली पेट नहीं किया जाएगा और इसे चिकित्सक की निगरानी में ही लगाया जाएगा। टीका लगाने के बाद किशोरियों को लगभग आधे घंटे तक निगरानी में रखा जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की प्रतिकूल प्रतिक्रिया होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान की जा सके।
इस अभियान को सफल बनाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वयं सहायता समूहों तथा पंचायती राज संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा शिक्षा विभाग के माध्यम से विद्यालयों में आयोजित अभिभावक बैठकों में भी एचपीवी संक्रमण और टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाई गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि यदि किसी कारणवश कोई किशोरी इस अभियान के दौरान टीकाकरण से वंचित रह जाती है, तो उसके लिए विशेष अवसर प्रदान किए जाएंगे। इसके लिए 19 अप्रैल, 10 मई, 24 मई और 21 जून 2026 को भी टीकाकरण सत्र आयोजित किए जाएंगे।
यह अभियान न केवल किशोरियों को गंभीर बीमारी से बचाने का प्रयास है, बल्कि समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। अभिभावकों और समाज के सभी वर्गों से अपील की गई है कि वे इस अभियान में सक्रिय सहयोग करें और अपनी बेटियों को समय पर टीकाकरण करवाएं।