National AYUSH Mission तथा आयुष विभाग हिमाचल प्रदेश के तत्वावधान में जिला आयुष विभाग बिलासपुर द्वारा आयुष ग्राम कार्यक्रम के अंतर्गत भगेड़ स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) में एक दिवसीय आयुष मेले का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य आम जनता को आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों से जोड़ना और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना था।
इस आयुष मेले का शुभारंभ एसडीएम घुमारवीं Gaurav Chaudhary ने किया। इस अवसर पर जिला आयुष अधिकारी डॉ. सुखविंदर कौर और उपमंडलीय चिकित्सा अधिकारी आयुष डॉ. मनीषा रानी गुप्ता भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।
मेले के दौरान आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा कुल 110 मरीजों की जांच की गई। इसके साथ ही उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दिया गया और आवश्यकतानुसार निःशुल्क औषधियां भी वितरित की गईं। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर एसडीएम गौरव चौधरी ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन लोगों को पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसे आयोजनों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक जीवनशैली के साथ-साथ पारंपरिक उपचार पद्धतियों का समन्वय स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी हो सकता है।
जिला आयुष अधिकारी डॉ. सुखविंदर कौर ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को दिनचर्या, ऋतुचर्या, योग और प्राणायाम के महत्व के बारे में जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि आयुष चिकित्सा पद्धतियां न केवल बीमारियों के इलाज में सहायक हैं, बल्कि यह रोगों की रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य सुधार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मेले में उपस्थित लोगों को योग, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास भी करवाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित योग और प्राणायाम से शरीर के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। यह तनाव को कम करने और जीवन की गुणवत्ता को सुधारने में मददगार होता है।
इसके अलावा, मेले में औषधीय पौधों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। इसमें विभिन्न जड़ी-बूटियों और उनके औषधीय उपयोगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। लोगों को औषधीय पौधों का वितरण भी किया गया, ताकि वे अपने घरों में इनका उपयोग कर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकें।
इस आयोजन के माध्यम से न केवल लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं, बल्कि उन्हें प्राकृतिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति जागरूक भी किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के आयोजन स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

कुल मिलाकर, भगेड़ में आयोजित यह आयुष मेला स्वास्थ्य सेवा, जागरूकता और पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने की दिशा में एक सफल प्रयास साबित हुआ। इससे लोगों को न केवल तत्काल स्वास्थ्य लाभ मिला, बल्कि उन्हें स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरणा भी मिली।