जिला बिलासपुर में दिव्यांगजनों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल के तहत कृत्रिम अंग वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी की जिला शाखा द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें उपायुक्त एवं रेड क्रॉस अध्यक्ष राहुल कुमार ने मुख्य रूप से शिरकत की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा कि दिव्यांगजनों के बीच उपस्थित होना उनके लिए गर्व और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल जरूरतमंद लोगों के जीवन में नई आशा और आत्मविश्वास का संचार करते हैं, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और सहयोग की भावना को भी मजबूत बनाते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि कृत्रिम अंग केवल एक सहायक उपकरण नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, सम्मान और गरिमापूर्ण जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन उपकरणों की सहायता से लाभार्थी अपने जीवन में नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेंगे और समाज में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।
कार्यक्रम में जिला पुलिस अधीक्षक संदीप धवल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने इस आयोजन के लिए सभी सहयोगी संस्थाओं और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल मानवता की सच्ची सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने सभी से एक समावेशी समाज के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया, जहां हर व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिले।
यह कार्यक्रम वर्धमान टेक्सटाइल लिमिटेड, बद्दी के सहयोग से दिव्यांग कल्याण संघ द्वारा किसान भवन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान कुल 30 लाभार्थियों को कृत्रिम अंग वितरित किए गए, जिनमें जिला बिलासपुर के 27, ऊना के 1 और हमीरपुर के 2 लाभार्थी शामिल रहे।
कार्यक्रम में अतिरिक्त उपायुक्त ओमकांत ठाकुर, दिव्यांग कल्याण संघ के अध्यक्ष विनोद राय, रेड क्रॉस के सचिव अमित कुमार, संघ की सचिव रचना कुमारी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जगदीश राम ठाकुर और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
तकनीकी सहयोग Fupro Innovations Private Limited की टीम द्वारा प्रदान किया गया, जिसमें टेक्नीशियन मनीष मेहरा, डॉ. अमित गुलाटी, प्रभजीत सिंह और हरिदत्त शामिल रहे। वहीं Vardhman Textiles Limited की ओर से प्रबंधक वीरेंद्र और कोऑर्डिनेटर संदीप ने कार्यक्रम में भाग लिया और सहयोग प्रदान किया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना था। कृत्रिम अंग प्राप्त करने के बाद लाभार्थियों के चेहरों पर खुशी और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे न केवल उनकी शारीरिक क्षमता में सुधार होता है, बल्कि मानसिक रूप से भी वे मजबूत होते हैं।
कुल मिलाकर, बिलासपुर में आयोजित यह कृत्रिम अंग वितरण कार्यक्रम सामाजिक समावेशन और मानवता की सेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण बना। इस पहल ने यह संदेश दिया कि समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना ही वास्तविक विकास है।
