हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया ने वर्चुअल माध्यम से जिला मुख्यालय बिलासपुर स्थित न्यायालय परिसर में स्थायी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रशासनिक न्यायाधीश बिलासपुर न्यायमूर्ति विपिन चंद्र नेगी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि बिलासपुर में लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय की स्थापना आवश्यक थी। इससे न्यायिक प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी और आमजन को शीघ्र एवं प्रभावी न्याय प्राप्त करने में राहत मिलेगी।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ज्योत्सना सुमंत डडवाल ने बताया कि वर्तमान में बिलासपुर सिविल एवं सत्र मंडल में कुल 28,859 मामले लंबित हैं, जिनमें 9,235 सिविल तथा 19,624 फौजदारी मामले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पहले केवल 15 दिनों के कैंप के माध्यम से मामलों की सुनवाई होती थी, जबकि अब स्थायी अतिरिक्त न्यायालय की स्थापना से प्रतिदिन नियमित सुनवाई संभव हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि यह कदम न्यायिक ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण में तेजी आएगी और आम लोगों को समयबद्ध न्याय मिल सकेगा।
इस अवसर पर बार एसोसिएशन बिलासपुर के अध्यक्ष एस.एल. ठाकुर ने स्थायी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय की स्थापना के लिए उच्च न्यायालय का आभार व्यक्त करते हुए इसे अधिवक्ताओं और वादकारियों दोनों के हित में एक दूरदर्शी निर्णय बताया।
इस मौके पर नव नियुक्त अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नवीश भारद्वाज ने अपने पद का कार्यभार भी ग्रहण किया।
कार्यक्रम में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. मोहित बंसल, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अक्षी शर्मा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव प्रतीक गुप्ता, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सोनिया गुप्ता, मोबाइल ट्रैफिक मजिस्ट्रेट राघव गुप्ता सहित अन्य न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और न्यायालय स्टाफ उपस्थित रहे।