भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी लाल शर्मा ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के भीतर चल रहा आपसी टकराव और बयानबाज़ी अब खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री, अधिकारी और सरकार के विभिन्न घटक आपस में उलझे हुए हैं, जबकि इस सत्ता संघर्ष का खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही है।
बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह के हालिया बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस सरकार के भीतर न तो आपसी समन्वय है और न ही नेतृत्व की कोई स्पष्ट दिशा। उन्होंने कहा कि एक मंत्री कुछ कहता है, दूसरा उसका खंडन करता है और तीसरा संयम की नसीहत देता है—यह स्थिति सरकार की अराजकता को उजागर करती है।
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि जब मंत्री सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया के माध्यम से अधिकारियों पर टिप्पणी करते हैं और फिर उसी सरकार के अन्य मंत्री इसे अनुचित ठहराते हैं, तो इससे प्रशासनिक अधिकारियों का मनोबल टूटता है। इसका सीधा असर विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था और जनहित से जुड़े निर्णयों पर पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के इस ‘आंतरिक रण’ का खामियाजा हिमाचल की 75 लाख जनता भुगत रही है। सचिवालय से लेकर फील्ड स्तर तक असमंजस की स्थिति बनी हुई है और अधिकारी यह तय नहीं कर पा रहे कि किसके निर्देशों का पालन करें।
बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए जानबूझकर विवादों को हवा दे रही है। जब जनता महंगाई, बेरोजगारी और सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों से जूझ रही है, तब सरकार के मंत्री आपसी बयानबाज़ी में व्यस्त हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी इस अव्यवस्था, अराजकता और जनता विरोधी रवैये को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी। कांग्रेस सरकार को सत्ता संघर्ष छोड़कर जनता के हितों पर ध्यान देना होगा, अन्यथा प्रदेश की जनता आने वाले समय में इसका करारा जवाब देगी।