भोरंज में ‘पोषण भी, पढ़ाई भी’ प्रशिक्षण संपन्न

rakesh nandan

25/03/2026

महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत पोषण अभियान के तहत बाल विकास परियोजना भोरंज में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम बुधवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। ‘पोषण भी, पढ़ाई भी’ विषय पर आधारित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बच्चों के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षित करना था।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 32 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया, जिन्हें पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए, जिनमें कार्यकर्ताओं को व्यावहारिक और सैद्धांतिक दोनों प्रकार की जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के दौरान कार्यकर्ताओं को नवचेतना आधारशिला, कुपोषण प्रबंधन, माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी, और पोषण 2.0 जैसे महत्वपूर्ण विषयों के बारे में जागरूक किया गया। इसके अलावा बच्चों के जीवन के प्रथम 1000 दिनों के महत्व पर विशेष जोर दिया गया, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

कार्यक्रम में स्तनपान के लाभ और कोलोस्ट्रम (मां का पहला दूध) के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि यह नवजात शिशु के लिए अत्यंत लाभकारी होता है और उसे रोगों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसके साथ ही कार्यकर्ताओं को आयु के अनुसार पूरक आहार, भोजन में विविधता और संतुलित आहार की आवश्यकता के बारे में भी जानकारी दी गई। इससे वे बच्चों और माताओं को सही पोषण संबंधी सलाह दे सकेंगी।

प्रशिक्षण में दिव्यांग बच्चों की पहचान (स्क्रीनिंग) और उनके समावेशन पर भी विशेष ध्यान दिया गया। कार्यकर्ताओं को यह सिखाया गया कि वे ऐसे बच्चों की पहचान कैसे करें और उन्हें समाज की मुख्यधारा से कैसे जोड़ें।

इसके अलावा ईसीसीई (Early Childhood Care and Education) गतिविधियों और विभिन्न असेसमेंट टूल्स के उपयोग के बारे में भी प्रशिक्षण दिया गया। इससे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के विकास का सही आकलन कर सकेंगी और आवश्यक कदम उठा सकेंगी।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी अनिल कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों के जीवन की प्रारंभिक अवस्था में पोषण और शिक्षा दोनों ही अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं और यही उनके भविष्य की मजबूत नींव तैयार करते हैं।

उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग—बच्चों और माताओं—के साथ सीधे जुड़ी होती हैं। इसलिए उनका प्रशिक्षित और जागरूक होना जरूरी है।

अनिल कुमार ने सभी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे इस प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को अपने-अपने क्षेत्रों में लागू करें और बच्चों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने में योगदान दें।

इस अवसर पर बाल विकास परियोजना अधिकारी भोरंज सुनील कुमार, वृत्त पर्यवेक्षक रवि कुमार, सुनील कुमार नड्डा, अभिषेक ठाकुर, कुंता राणा, अंजना शर्मा और अन्य कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए ज्ञानवर्धक और उपयोगी साबित हुआ। इससे न केवल उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि बच्चों के समग्र विकास में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।