भोरंज में ‘कमाल की तैयारी’ समर कैंप के लिए प्रशिक्षण आयोजित

rakesh nandan

09/06/2026

भोरंज में ‘कमाल की तैयारी’ समर कैंप के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण, 80 हजार बच्चों तक पहुंचने का लक्ष्य

महिला एवं बाल विकास विभाग तथा ‘प्रथम’ एजुकेशन फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में प्रदेशभर के चयनित आंगनवाड़ी केंद्रों में आयोजित किए जा रहे समर कैंप-2026 ‘कमाल की तैयारी’ अभियान के तहत भोरंज खंड में भी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। बच्चों के नामांकन, नियमित उपस्थिति और विद्यालय प्रवेश की तैयारी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता बाल विकास जिला परियोजना अधिकारी सुनील कुमार ने की। कार्यक्रम में भोरंज खंड के 40 चयनित आंगनवाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और अभियान के सफल संचालन के लिए आवश्यक जानकारी प्राप्त की।

6,400 से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में चलेगा अभियान

‘कमाल की तैयारी’ समर कैंप प्रदेश के 6,400 से अधिक चयनित आंगनवाड़ी केंद्रों में आयोजित किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों को विद्यालय में प्रवेश से पहले मानसिक, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से तैयार करना है।

महिला एवं बाल विकास विभाग का मानना है कि प्रारंभिक बाल शिक्षा बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव तैयार करती है। इसी सोच के साथ इस अभियान को व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है।

40 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया गया प्रशिक्षण

भोरंज में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में 40 आंगनवाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं को अभियान की कार्यप्रणाली, उद्देश्यों और गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के दौरान कार्यकर्ताओं को बच्चों के समग्र विकास, खेल आधारित शिक्षा और प्रारंभिक शिक्षण गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के तरीके बताए गए।

अधिकारियों ने कहा कि प्रशिक्षित कार्यकर्ता बच्चों और अभिभावकों के साथ बेहतर संवाद स्थापित कर कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

‘प्रथम’ एजुकेशन फाउंडेशन ने समझाई अभियान की बारीकियां

प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन की जिला समन्वयक रेणुका शर्मा तथा अधिकारी रमेश धीमान ने प्रशिक्षण सत्रों का संचालन किया।

उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को अभियान की विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन कर उनकी उपयोगिता समझाई। प्रशिक्षण में बच्चों की सीखने की क्षमता, भाषा विकास, संज्ञानात्मक कौशल और सामाजिक व्यवहार को बेहतर बनाने से जुड़ी गतिविधियों पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यकर्ताओं को यह भी बताया गया कि बच्चों की रुचि बनाए रखने के लिए खेल, कहानी, चित्रकला और समूह गतिविधियों का उपयोग कैसे किया जा सकता है।

13 से 16 जून तक होंगे समर मेले

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि बाल विकास परियोजना भोरंज के चयनित आंगनवाड़ी केंद्रों में 13 जून से 16 जून 2026 के बीच समर मेले आयोजित किए जाएंगे।

इन मेलों के माध्यम से बच्चों और अभिभावकों को कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा। साथ ही समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को रोचक बनाने का प्रयास किया जाएगा।

समर मेले में विभिन्न शिक्षण गतिविधियां, खेल आधारित कार्यक्रम और अभिभावक सहभागिता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

80 हजार बच्चों तक पहुंचने का लक्ष्य

‘कमाल की तैयारी’ अभियान के तहत हिमाचल प्रदेश में 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 80,000 बच्चों तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

अभियान का उद्देश्य बच्चों को विद्यालय में प्रवेश के लिए तैयार करना, उनकी सीखने की क्षमता को बढ़ाना और प्रारंभिक शिक्षा के प्रति रुचि विकसित करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस आयु वर्ग में बच्चों को उचित मार्गदर्शन और सीखने का वातावरण मिलने से उनकी भविष्य की शैक्षणिक उपलब्धियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

अभिभावकों की भागीदारी पर विशेष जोर

अभियान में बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को बताया गया कि माता-पिता को बच्चों की शिक्षा और विकास प्रक्रिया से जोड़ना आवश्यक है।

अभिभावकों को यह समझाया जाएगा कि घर पर बच्चों के साथ संवाद, खेल और सीखने से जुड़ी छोटी-छोटी गतिविधियां उनके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

‘कमाल की तैयारी’ समर कैंप केवल विद्यालय पूर्व शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य बच्चों के बौद्धिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को भी प्रोत्साहित करना है।

महिला एवं बाल विकास विभाग और प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन की यह संयुक्त पहल प्रारंभिक बाल शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। भोरंज में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बच्चों के समग्र विकास के लिए आवश्यक कौशल और जानकारी प्रदान की गई, जिससे अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।