रांची में ‘भागवंत‍ि देवी छात्रावास’ का लोकार्पण

rakesh nandan

10/03/2026

रांची में ‘भागवंत‍ि देवी छात्रावास’ का लोकार्पण

राजीव बिंदल ने रांची जिले के गोइलकेरा क्षेत्र में 200 विद्यार्थियों के लिए निर्मित ‘भागवंत‍ि देवी छात्रावास’ के लोकार्पण समारोह में भाग लेकर इसे अपने जीवन का अत्यंत भावनात्मक और गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह अवसर उनके लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस छात्रावास का नाम उनकी पूज्य माताजी स्वर्गीय श्रीमती भागवंत‍ि देवी के नाम पर रखा गया है। इस कारण यह कार्यक्रम उनके लिए केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि गहरी व्यक्तिगत भावनाओं से जुड़ा हुआ अनुभव है।


चार दशक पुरानी यादें हुईं ताजा

डॉ. बिंदल ने कहा कि इस कार्यक्रम में शामिल होकर उन्हें लगभग 40 वर्ष पुरानी स्मृतियाँ फिर से याद आ गईं। उन्होंने बताया कि वर्षों पहले उन्हें इसी क्षेत्र में वनवासी समाज के बीच सेवा कार्य करने का अवसर मिला था। उस समय उन्होंने चिकित्सा सेवा और विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय लोगों की सेवा करने का प्रयास किया था। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद वनवासी समाज के बीच रहकर काम करना उनके जीवन का बेहद महत्वपूर्ण अनुभव रहा।


भगवान बिरसा मुंडा की भूमि को किया नमन

डॉ. बिंदल ने इस अवसर पर बिरसा मुंडा की वीरभूमि को नमन करते हुए कहा कि यह भूमि देश के स्वतंत्रता संग्राम और आदिवासी समाज के संघर्ष की प्रतीक रही है। उन्होंने कहा कि इसी भूमि पर वर्षों पहले सेवा कार्य करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात थी और आज उसी स्थान पर छात्रों के लिए छात्रावास का निर्माण होना अत्यंत संतोषजनक है।


शिक्षा के माध्यम से बदलेगा बच्चों का भविष्य

डॉ. बिंदल ने कहा कि यह छात्रावास केवल एक भवन नहीं है बल्कि सेवा, समर्पण और समाज के प्रति दायित्व की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यहां रहने वाले वनवासी बच्चे शिक्षा प्राप्त कर अपने जीवन को बेहतर बनाएंगे और भविष्य में राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा ही समाज के विकास का सबसे मजबूत आधार है और ऐसे प्रयास समाज के वंचित वर्गों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


वनवासी कल्याण आश्रम के प्रयासों की सराहना

डॉ. बिंदल ने इस अवसर पर वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस संगठन के माध्यम से देशभर में वनवासी समाज के उत्थान के लिए अनेक सेवा परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने संगठन के संस्थापक बाबा साहेब देशपांडे को नमन करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और संकल्प से देशभर में समाज सेवा के कई महत्वपूर्ण कार्य शुरू हुए।


गुरुजी गोलवलकर को भी किया नमन

डॉ. बिंदल ने इस अवसर पर माधव सदाशिवराव गोलवलकर ‘गुरूजी’ को भी श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि उनकी प्रेरणा से ही वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना हुई और देशभर में वनवासी समाज के बीच सेवा कार्यों का व्यापक अभियान शुरू हुआ।


माता-पिता की स्मृतियों को किया याद

डॉ. बिंदल ने कहा कि इस अवसर पर उन्हें अपने माता-पिता की स्मृतियाँ विशेष रूप से याद आ रही हैं। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें सेवा और समाज के प्रति समर्पण का संस्कार दिया, जिसने उनके जीवन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि माता-पिता का आशीर्वाद और उनके द्वारा दिए गए संस्कार ही उन्हें लगातार समाज सेवा के कार्यों के लिए प्रेरित करते रहे हैं।


समाज सेवा ही सबसे बड़ी पूंजी

कार्यक्रम के अंत में डॉ. बिंदल ने अपने माता-पिता के चरणों में नमन करते हुए कहा कि समाज सेवा का भाव ही उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी वे इसी भावना के साथ राष्ट्र और समाज के लिए कार्य करते रहेंगे।