राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने आज रिकांग पिओ स्थित आईटीडीपी भवन के सम्मेलन कक्ष में आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय मधुमक्खी पालन संगोष्ठी का शुभारंभ किया।
इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग 200 मधुमक्खी पालकों और किसानों ने भाग लिया।
मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण आवश्यक — जगत सिंह नेगी
अपने संबोधन में मंत्री नेगी ने कहा कि—
मधुमक्खी पालन आधुनिक कृषि और बागवानी का महत्वपूर्ण अंग है।
गुणवत्तापूर्ण फल उत्पादन में मधुमक्खियों की परागण भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
किसानों को रसायनों का न्यूनतम उपयोग करना चाहिए ताकि मधुमक्खियों और मानव स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रहें।
उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे सर्दियों के दौरान कॉलोनी माइग्रेशन को कम करने की तकनीकें विकसित करें, जिससे किसानों की लागत व जोखिम कम होगा।
सेब की नई किस्मों और गुणवत्ता आधारित बागवानी पर जोर
नेगी ने कहा कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, इसलिए बागवानों को—
उच्च गुणवत्ता वाले फलों पर ध्यान देना होगा
नवीनतम सेब किस्मों को अपनाना होगा
कीटनाशक-रहित खेती की ओर बढ़ना होगा
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार शहद उत्पादन को बढ़ावा देने पर विशेष कार्य कर रही है, जिससे ग्रामीण महिलाओं और बागवानों की आर्थिकी मजबूत होगी।
हिमालयी क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन की अपार संभावनाएं — उपायुक्त किन्नौर
उपायुक्त डॉ. अमित शर्मा ने कहा कि किन्नौर सहित हिमाचल के पर्वतीय क्षेत्रों की—
विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियां
प्राकृतिक मधुमक्खी चारा उपलब्धता
मधुमक्खी पालन उद्योग को सुदृढ़ बनाती हैं।
राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड द्वारा वित्त पोषित परियोजना का विस्तृत परिचय
उपनिदेशक उद्यान डॉ. भूपेंद्र नेगी ने बताया कि यह सेमिनार डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौनी के आरएचआरटीएस शारबो द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड द्वारा वित्त पोषित परियोजना—
“हाई-हिल बीकीपिंग के लिए हनी एंड हाइव प्रोडक्ट्स मॉडल”
के अंतर्गत संचालित है।
इस परियोजना के लाभ—
पर्वतीय क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा
परागण में सुधार
फसल हानि में कमी
किसानों की आय में वृद्धि
युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
अब तक—
2 बेसिक और 2 विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
सुंगरा और बरी गांवों की 2 महिला स्वयं सहायता समूहों को Apis mellifera कॉलोनियां और उपकरण उपलब्ध करवाए गए
कार्यक्रम में वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के महत्वपूर्ण सत्र
आरएचआरटीएस शारबो के सहायक निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया।
नौनी विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. इंदर देव ने वैज्ञानिक जानकारी ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने के विश्वविद्यालय के प्रयास बताए।
परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. एस.सी. वर्मा ने परियोजना के वैज्ञानिक मॉडल और उपयोगिता पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में मिट्टी के छत्तों के डेमो यूनिट का फील्ड विजिट भी आयोजित किया जाएगा।
उपस्थिति
कार्यक्रम में 17वीं वाहिनी आईटीबीपी के कमांडेंट सुनील कुमार, परियोजना अधिकारी आईटीडीपी घनश्याम दास शर्मा, पंचायत समिति कल्पा अध्यक्षा ललिता पंचारस, एसडीएम कल्पा अमित कल्थाईक, डीएसपी उमेश्वर राणा, जिला परिषद सदस्य हितेष नेगी, विभागीय अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।