बैकयार्ड पोल्ट्री योजना से ग्रामीणों को मिल रहा स्वरोजगार

rakesh nandan

11/03/2026

बैकयार्ड पोल्ट्री योजना से ग्रामीण परिवारों को मिल रहा स्वरोजगार

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से पशुपालन विभाग के माध्यम से बैकयार्ड पोल्ट्री योजना को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से जिला सिरमौर सहित प्रदेश के कई जिलों में ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। यह योजना कम लागत में आय बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। इसके माध्यम से ग्रामीण परिवार अतिरिक्त आय अर्जित करने के साथ-साथ अपने जीवन स्तर को बेहतर बना रहे हैं।


आय का सशक्त माध्यम बनी योजना

प्रदेश सरकार की बैकयार्ड पोल्ट्री योजना ग्रामीण परिवारों के लिए आय का एक मजबूत साधन बन रही है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को पोल्ट्री पालन से जुड़ी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें नियमित आय प्राप्त करने का अवसर मिलता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित संसाधनों के बावजूद पोल्ट्री पालन के माध्यम से परिवार अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रहे हैं।


लाभार्थियों की बदली आर्थिक स्थिति

इस योजना का लाभ उठाने वाले कई लाभार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। मुकेश, प्रदीप कुमार और उर्वशी जैसे लाभार्थी पहले आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे थे। सीमित आय और संसाधनों के कारण उनका जीवन-यापन चुनौतीपूर्ण था। लेकिन बैकयार्ड पोल्ट्री योजना से जुड़ने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और यह योजना उनके लिए आय का एक भरोसेमंद स्रोत बन गई है।


नाहन हैचरी से मिलते हैं गुणवत्तापूर्ण चूजे

बैकयार्ड पोल्ट्री योजना के लाभार्थी मुकेश ने बताया कि वे पिछले कुछ वर्षों से नाहन की हैचरी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें हर हैच में लगभग 200 से 250 चूजे प्राप्त होते हैं। नाहन हैचरी में तैयार किए गए चूजे अच्छी गुणवत्ता के होते हैं और उनका विकास भी तेजी से होता है। मुकेश ने बताया कि इन चूजों को पालने के बाद उनसे प्राप्त अंडों से नए चूजे तैयार किए जाते हैं। अंडों की बिक्री से उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है।


परिवार की आय में हुआ इजाफा

सराहां निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि उन्होंने भी इस योजना के अंतर्गत नाहन हैचरी से चूजे प्राप्त किए हैं। इन चूजों की देखभाल उनके परिवार द्वारा की जा रही है, जिसमें उनकी पत्नी मुख्य भूमिका निभा रही हैं। प्रदीप स्वयं खेती और मजदूरी करते हैं, जबकि पोल्ट्री पालन का कार्य उनकी पत्नी संभालती हैं। इससे उनके परिवार की आय में वृद्धि हो रही है।


महिला सशक्तिकरण को मिल रहा बढ़ावा

पांवटा साहिब निवासी उर्वशी ने बताया कि उनका परिवार लंबे समय से बैकयार्ड पोल्ट्री योजना से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है और उनकी आय में भी वृद्धि हुई है। उर्वशी के अनुसार यह योजना महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभदायक साबित हो रही है और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही है।


पांच जिलों में हो रहा चूजों का वितरण

बैकयार्ड पोल्ट्री योजना के अंतर्गत नाहन से सिरमौर के अलावा सोलन, ऊना, किन्नौर और शिमला जिलों में भी चूजों का वितरण किया जा रहा है। एक वर्ष में लगभग दो लाख एक दिवसीय चूजों के वितरण का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक एक दिवसीय चूजा मात्र 32 रुपये की दर से उपलब्ध कराया जाता है और इसमें मैरिक्स प्रोटेक्शन वैक्सीन पहले से लगाई जाती है।


नई मॉडल हैचरी का हो रहा निर्माण

पोल्ट्री उत्पादन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए लगभग 2 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से नई मॉडल हैचरी का निर्माण किया जा रहा है। वर्तमान में यहां 65 सप्ताह तक पालित मुर्गियों के अंडों से चूजे तैयार किए जाते हैं, जिन्हें प्रदेश के विभिन्न जिलों में वितरित किया जाता है।


प्रशिक्षण से मिल रहा वैज्ञानिक ज्ञान

इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को पोल्ट्री पालन से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जाता है। लाभार्थियों को एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से वैज्ञानिक तरीके से मुर्गी पालन की जानकारी प्रदान की जाती है। हर वर्ष लगभग 900 पशुपालकों को प्रशिक्षण दिया जाता है, जबकि पिछले वर्ष 1145 लाभार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।


ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती

बैकयार्ड पोल्ट्री योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पोल्ट्री पालन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस योजना से न केवल अंडा उत्पादन बढ़ा है बल्कि ग्रामीण परिवारों को कम लागत में बेहतर पोषण भी मिल रहा है। पोल्ट्री से प्राप्त खाद का उपयोग किसान खेती और मशरूम उत्पादन में भी कर रहे हैं, जिससे उनकी आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हो रहे हैं। इस प्रकार बैकयार्ड पोल्ट्री योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और जिला सिरमौर को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।