फस्टे में आयुष मेला, 300 लोगों की स्वास्थ्य जांच

rakesh nandan

27/03/2026

आयुष विभाग द्वारा ग्राम पंचायत फस्टे में शुक्रवार को एक भव्य आयुष मेला आयोजित किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आम जनता को आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना था। इस अवसर पर ओबीसी वित्त एवं विकास निगम के उपाध्यक्ष डॉ. मोहन लाल कौंडल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आयुर्वेद, योग और प्राणायाम जैसी प्राचीन भारतीय पद्धतियां हमारे जीवन को स्वस्थ और संतुलित बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इन पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और आयुष विभाग द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। इस दौरान उन्होंने आयुष विभाग द्वारा प्रकाशित आयुष पत्रिका का विमोचन भी किया।

स्वास्थ्य सेवाओं की विस्तृत जानकारी

कार्यक्रम की शुरुआत में जिला आयुष अधिकारी डॉ. राजेश कालिया ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी दी। इसके बाद उपमंडलीय आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुमन बाला ने आयुष ग्राम कार्यक्रम के तहत संचालित गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आयुष विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने और लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।

300 लोगों की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच

मेले के दौरान लगाए गए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर में लगभग 300 लोगों की जांच की गई। इस शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विभिन्न रोगों की जांच की गई और लोगों को उचित परामर्श भी दिया गया। इसके अलावा मरीजों को आयुर्वेदिक औषधियां भी निःशुल्क वितरित की गईं, जिससे उन्हें प्राकृतिक उपचार का लाभ मिल सके।

औषधीय पौधों का वितरण

कार्यक्रम के दौरान लोगों को औषधीय पौधे भी वितरित किए गए, जिससे वे अपने घरों में ही प्राकृतिक चिकित्सा के छोटे-छोटे उपाय अपना सकें। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता दोनों के लिए लाभकारी साबित हो रही है।

पारंपरिक आहार पर जोर

आयुष मेले में एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें रागी, बाजरा, जौ और अन्य मोटे अनाज के महत्व को दर्शाया गया। विशेष रूप से “अपनी रसोई, अपना उपचार” थीम के तहत लोगों को यह बताया गया कि किस प्रकार रोजमर्रा के खानपान में बदलाव कर कई बीमारियों से बचा जा सकता है। विशेषज्ञों ने बताया कि मोटे अनाज न केवल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, बल्कि ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।

योग और प्राणायाम का महत्व

मेले के दौरान योग और प्राणायाम के महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित योगाभ्यास से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और कई गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है। लोगों को योग के सरल आसनों और प्राणायाम की विधियों की जानकारी भी दी गई, ताकि वे इन्हें अपनी दिनचर्या में आसानी से शामिल कर सकें।

जनप्रतिनिधियों की सहभागिता

इस कार्यक्रम में नादौन ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष कैप्टन पृथी चंद, एपीएमसी सदस्य रमेश पराशर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ती है और वे प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं।

आयुष मेले का महत्व

आयुष मेले जैसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने और लोगों को जागरूक करने का एक प्रभावी माध्यम हैं। इससे न केवल लोगों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधाएं मिलती हैं, बल्कि वे स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित होते हैं। यह मेला इस बात का प्रमाण है कि यदि पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों का समन्वय किया जाए, तो समाज को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं। अंत में, आयुष विभाग ने लोगों से अपील की कि वे इन सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और स्वस्थ जीवन की दिशा में कदम बढ़ाएं।