कुपोषण से निपटने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण
कुपोषण की समस्या को दूर करने और लोगों को सही पोषण के महत्व के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पोषण संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करना है, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को सही आहार और पोषण के बारे में जागरूक कर सकें।
शिविर के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने दी जानकारी
शिविर के दूसरे दिन वीरवार को विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी अनिल कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पोषण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी और बताया कि बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार बेहद महत्वपूर्ण है।
कई अधिकारी और पर्यवेक्षक रहे उपस्थित
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे—
बाल विकास परियोजना अधिकारी सुनील कुमार
खंड समन्वयक अक्षय महाजन
पर्यवेक्षक रवि कुमार
सुनील नड्डा
वृत्त पर्यवेक्षक आशा रानी
सरोज देवी
अंजना शर्मा
कुंन्ता राणा
सुनीता धीमान
इन सभी ने प्रशिक्षण सत्रों में भाग लेकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन प्रदान किया।
कुपोषण प्रबंधन पर हुई चर्चा
प्रशिक्षण शिविर के दौरान कुपोषण प्रबंधन पर विशेष रूप से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि कुपोषण बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इसके प्रति जागरूकता बेहद जरूरी है। कार्यकर्ताओं को यह भी बताया गया कि समुदाय स्तर पर लोगों को सही पोषण के बारे में जानकारी देना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी पर भी जानकारी
शिविर के दौरान प्रतिभागियों को माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी से होने वाली समस्याओं के बारे में भी बताया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन और खनिजों का संतुलित सेवन आवश्यक है। इसलिए बच्चों और महिलाओं को संतुलित आहार प्रदान करना जरूरी है।
पोषण अभियान 2.0 पर चर्चा
प्रशिक्षण कार्यक्रम में पोषण अभियान 2.0 के अंतर्गत किए जा रहे विभिन्न हस्तक्षेपों की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के माध्यम से कुपोषण को कम करने और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
जीवन के पहले 1000 दिन महत्वपूर्ण
सत्रों में बच्चों के जीवन के पहले 1000 दिनों की महत्वपूर्ण अवधि के बारे में भी विस्तार से बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि यह अवधि बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है। इस दौरान सही पोषण और देखभाल से बच्चे के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
स्तनपान के महत्व पर दिया जोर
प्रशिक्षण में स्तनपान के लाभ और कोलोस्ट्रम (मां का पहला दूध) के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि मां का पहला दूध नवजात शिशु के लिए बेहद लाभकारी होता है और यह बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।
पूरक आहार और भोजन विविधता
शिविर में प्रतिभागियों को आयु-अनुसार पूरक आहार और भोजन विविधता के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि बच्चों के आहार में विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ शामिल करना जरूरी है ताकि उन्हें सभी आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें।
लगभग 100 कार्यकर्ताओं ने लिया भाग
प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन लगभग 100 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। उन्हें प्रेरित किया गया कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को अपने-अपने आंगनवाड़ी केंद्रों पर लागू करें और लोगों को सही पोषण के प्रति जागरूक बनाएं।
समुदाय में जागरूकता फैलाने की अपील
अधिकारियों ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे अपने क्षेत्रों में जाकर माताओं और परिवारों को पोषण संबंधी सही जानकारी दें। इससे कुपोषण की समस्या को कम करने और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।