सड़क निर्माण के विरोध में ग्रामीण, पेड़ कटान पर नाराजगी

rakesh nandan

19/03/2026

जिला के ग्राम पंचायत अजोली के अंतर्गत जम्बुखाला बस्ती तक प्रस्तावित सड़क निर्माण को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए करीब 70 से अधिक पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।

मीडिया से बातचीत करते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि घुमंतू गुर्जरों की बस्ती जम्बुखाला तक सड़क निर्माण के लिए प्रशासन और वन विभाग द्वारा अनुमति प्रदान की गई है। इस प्रस्तावित मार्ग के निर्माण के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों को काटा जाना तय किया गया है, जिसे लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।

ग्रामीणों का कहना है कि जम्बुखाला तक पहुंचने के लिए पहले से ही एक मार्ग उपलब्ध है, जो मुगलावाला करतारपुर ग्राम पंचायत की ओर से जाता है। यह मार्ग न केवल वर्षों से उपयोग में है, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड में भी दर्ज है। ऐसे में नए मार्ग के निर्माण की आवश्यकता समझ से परे है।

स्थानीय लोगों का तर्क है कि यदि पहले से मौजूद मार्ग को पक्का कर दिया जाए, तो बिना एक भी पेड़ काटे सड़क सुविधा को बेहतर बनाया जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सरकारी संसाधनों का भी सही उपयोग होगा।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों के दबाव में आकर प्रशासन और संबंधित विभाग नया मार्ग बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं, जबकि इसका कोई व्यावहारिक औचित्य नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले से मार्ग मौजूद है और उसका उपयोग दशकों से किया जा रहा है, तो फिर नए मार्ग के नाम पर पेड़ों की कटाई क्यों की जा रही है।

इस मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पेड़ों का कटान किया गया, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए वे किसी भी स्तर तक जाने को तैयार हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, प्रस्तावित सड़क निर्माण से न केवल पर्यावरण को नुकसान होगा, बल्कि क्षेत्र की हरियाली भी प्रभावित होगी। पेड़ों की कटाई से जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

इस मुद्दे पर स्थानीय ग्रामीणों अनिल कुमार, गिरिराम चौधरी, सुनीता देवी और प्रमिता ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ऐसे विकास का समर्थन नहीं कर सकते जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए।

उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस मामले में पुनर्विचार करना चाहिए और मौजूदा सड़क को ही विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए। इससे लोगों को सुविधा भी मिलेगी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और स्थानीय लोगों की भागीदारी जरूरी है। यदि किसी परियोजना से सीधे तौर पर स्थानीय लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है, तो उनकी राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

इस पूरे मामले ने प्रशासन और ग्रामीणों के बीच संवाद की आवश्यकता को भी उजागर किया है। यदि समय रहते इस मुद्दे का समाधान नहीं किया गया, तो यह विवाद और बढ़ सकता है।

फिलहाल, यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या निर्णय लेता है।