भारत में आपदा प्रबंधन में एआई और मशीन लर्निंग की क्रांति: पारंपरिक राहत मॉडल से ‘लचीलेपन’ आधारित प्रणाली की ओर बदलाव

rakesh nandan

17/11/2025

भारत भौगोलिक और जलवायु विविधता वाला देश है, जहाँ हर वर्ष भूकंप, बाढ़, चक्रवात, सूखा, भूस्खलन और जंगल में आग जैसी आपदाएँ भारी जन-धन हानि का कारण बनती हैं। पारंपरिक आपदा प्रबंधन प्रणाली लंबे समय तक “प्रतिक्रियात्मक” रही—यानि आपदा के बाद राहत व पुनर्वास पर केंद्रित।

लेकिन जलवायु परिवर्तन, तेज शहरीकरण और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती तीव्रता को देखते हुए भारत अब “सक्रिय, पूर्वानुमानित और प्रौद्योगिकी-संचालित” आपदा प्रबंधन की ओर बढ़ रहा है। इस परिवर्तन के केंद्र में हैं—कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML)


कैसे बदल रहा है एआई/एमएल भारत का आपदा प्रबंधन?

1️⃣ पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ (Early Warning Systems)

एआई/एमएल मॉडल उपग्रह डेटा, वर्षा पैटर्न, नदी स्तर और मौसम जानकारी का विश्लेषण कर—

  • बाढ़

  • चक्रवात

  • सूखा
    की सटीक भविष्यवाणी करने में सक्षम हैं।

2️⃣ उपग्रह और सुदूर संवेदन (Remote Sensing)

इसरो के Cartosat और RISAT उपग्रहों से प्राप्त हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरों का AI विश्लेषण संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करता है।

3️⃣ रियल-टाइम मॉनिटरिंग

IoT सेंसर, ड्रोन और UAV से प्राप्त डेटा को एमएल मॉडल उपयोग कर—

  • भूस्खलन,

  • नदी जलस्तर में बदलाव,

  • चक्रवात की गति
    जैसी स्थितियों का रियल-टाइम अलर्ट जारी करता है।

4️⃣ राहत और बचाव कार्यों में एआई

एआई-संचालित ड्रोन, रोबोट और GIS-आधारित मैपिंग—

  • राहत वितरण

  • खोज और बचाव

  • मार्ग विश्लेषण
    में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

5️⃣ जोखिम मानचित्रण (Risk Mapping)

एमएल से भेद्यता मानचित्र (Vulnerability Maps) तैयार किए जाते हैं जो बताते हैं कि कौन से क्षेत्र जोखिम में हैं।

6️⃣ संचार और जागरूकता

एआई आधारित—

  • मल्टीलिंगुअल चैटबॉट

  • हेल्पलाइन

  • अलर्टिंग सिस्टम
    दूरस्थ क्षेत्रों तक भी चेतावनी पहुँचाते हैं।


भारत की प्रमुख पहलें

▶️ IMD (भारतीय मौसम विभाग)

एआई आधारित Nowcasting System भारी वर्षा और बिजली गिरने की भविष्यवाणी करता है।

▶️ NDMA (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण)

Common Alerting Protocol के तहत मल्टी-हैज़र्ड अलर्ट सिस्टम लागू कर रहा है।

▶️ INCOIS (हैदराबाद)

सुनामी चेतावनी केंद्र डीप लर्निंग आधारित समुद्र स्तर विश्लेषण से सटीक प्रारंभिक चेतावनी देता है।

▶️ मेघदूत और दामिनी ऐप

IMD और IITM के ऐप जो मौसम और बिजली गिरने के अलर्ट जारी करते हैं।


मुख्य केस स्टडीज

चक्रवात अम्फान और यास (2020-21)

एआई आधारित सिमुलेशन से चक्रवात की दिशा और तीव्रता का 90% सटीक अनुमान लगाया गया, जिससे बड़ी संख्या में जानें बचाईं गईं।

केरल बाढ़ (2018 एवं 2022)

इसरो और गूगल एआई ने उपग्रह डेटा का विश्लेषण कर बाढ़-जोखिम वाले क्षेत्रों की रियल-टाइम मैपिंग की।


एआई/एमएल के प्रमुख लाभ

  • पूर्व चेतावनी की सटीकता में वृद्धि

  • मानवीय और आर्थिक हानि में कमी

  • त्वरित राहत वितरण

  • रियल-टाइम निर्णय सहायता

  • डेटा-संचालित शासन


⚠️ मुख्य चुनौतियाँ

  • डेटा साझा करने में बाधाएँ

  • तकनीकी अवसंरचना की कमी

  • विभागों के बीच समन्वय की समस्या

  • साइबर सुरक्षा जोखिम

  • अंतिम-मील तक चेतावनी पहुँचाने की कठिनाई


आगे की राह

भारत को एक एआई-एकीकृत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन ढाँचा अपनाने की आवश्यकता है।
सुझाव—

  • एनडीएमए व इसरो का डेटा ओपन-सोर्स किया जाए

  • सामुदायिक-आधारित एआई चेतावनी प्रणालियाँ विकसित हों

  • भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप AI मॉडल प्रशिक्षित हों

  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) बढ़ाई जाए