Dr. Y.S. Parmar University of Horticulture and Forestry के उप-परिसर औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, थुनाग (गोहर–गुडाहरी), मंडी में कृषि वानिकी (एग्रोफॉरेस्ट्री) विषय पर पाँच दिवसीय संस्थागत कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने और उनकी आय में वृद्धि के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय कृषि विकास योजना–कैफेटेरिया (RKVY) के कृषि वानिकी घटक के अंतर्गत आयोजित किया गया। इस योजना के तहत राज्यों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कृषि गतिविधियों का चयन करने की स्वतंत्रता मिलती है, जिससे क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप योजनाओं को लागू किया जा सके।
महाविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. नेहा ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को कृषि वानिकी की आधुनिक तकनीकों, गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री और टिकाऊ आय के साधनों से परिचित करवाना था। उन्होंने कहा कि आज के समय में कृषि वानिकी किसानों के लिए आय का एक मजबूत और स्थायी विकल्प बनकर उभर रही है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा कृषि वानिकी से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत व्याख्यान दिए गए। इनमें कृषि वानिकी की अवधारणा, हिमालयी क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता, विभिन्न कृषि वानिकी प्रणालियाँ और औषधीय पौधों पर आधारित मॉडल शामिल थे। इसके साथ ही किसानों को यह भी बताया गया कि कैसे वे अपनी भूमि पर बहुउद्देशीय वृक्ष प्रजातियों को अपनाकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम में कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी गई, जिससे किसान सरकारी सहायता का लाभ उठा सकें। सब्जियों और विदेशी सब्जियों की भूमिका पर भी चर्चा की गई, जिससे किसानों को बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिल सकते हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और उससे निपटने के उपायों पर भी विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी साझा की।
प्रबंधन से जुड़े सत्रों में मृदा स्वास्थ्य सुधार, पौधों की छंटाई और कैनोपी प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। इसके अलावा किसानों को बाजार से जुड़ाव बढ़ाने और कृषि आधारित उद्यमिता के अवसरों के बारे में भी मार्गदर्शन दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मूल्य संवर्द्धन, प्रसंस्करण और भंडारण तकनीकों के बारे में भी जानकारी दी गई, जिससे वे अपनी उपज का बेहतर उपयोग कर सकें। फ्लोरीकल्चर और पशुपालन प्रबंधन जैसे विषयों को भी शामिल किया गया, ताकि किसान विविध कृषि गतिविधियों के माध्यम से अपनी आय के स्रोत बढ़ा सकें।
इस कार्यक्रम की एक विशेषता यह रही कि इसमें किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। फील्ड विजिट और लाइव प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को व्यावहारिक अनुभव दिया गया, जिससे वे सीखी गई तकनीकों को अपने खेतों में आसानी से लागू कर सकें।
इसके अतिरिक्त, किसानों को गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री और उपयुक्त कृषि वानिकी प्रणालियों के चयन के बारे में भी मार्गदर्शन दिया गया। इससे उन्हें अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार सही फसलों और वृक्षों का चयन करने में मदद मिलेगी।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के कौशल विकास के साथ-साथ उनकी आय में वृद्धि और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
कुल मिलाकर, इस पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ने किसानों को नई तकनीकों, बेहतर प्रबंधन और बाजार उन्मुख खेती की दिशा में प्रेरित किया है, जिससे भविष्य में कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
