ऊना में 39,373 किसानों की डिजिटल किसान रजिस्ट्री

rakesh nandan

10/03/2026

ऊना में एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से बन रही डिजिटल किसान रजिस्ट्री

प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पहलें की जा रही हैं। इसी दिशा में राज्य सरकार ने किसानों की डिजिटल किसान रजिस्ट्री तैयार करने का कार्य शुरू किया है। सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश में कृषि क्षेत्र को तकनीक आधारित बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से किसानों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इस पहल के तहत किसानों की भूमि, फसल और सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। इससे योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक पारदर्शी और सरल तरीके से पहुंच सकेगा।


जिले में तेजी से बढ़ रहा किसान पंजीकरण

प्रेम सिंह ठाकुर, कृषि विभाग के उपनिदेशक ऊना ने जानकारी देते हुए बताया कि एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से जिले में अब तक 39,373 किसानों को किसान रजिस्ट्री से जोड़ा जा चुका है। उन्होंने बताया कि किसानों के लिए ऑनलाइन फार्मर रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य किया गया है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत प्रत्येक किसान को एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूनीक फार्मर आईडी) प्रदान की जाएगी। यह यूनिक आईडी किसान से जुड़ी सभी जानकारी को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखेगी। इससे भविष्य में किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में काफी सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल किसान रजिस्ट्री बनने से किसानों की जानकारी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध होगी और योजनाओं का लाभ वितरण भी अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।


योजनाओं का लाभ मिलेगा पारदर्शी तरीके से

कृषि विभाग के अनुसार एग्रीस्टैक पोर्टल किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित होगा। इस पोर्टल के माध्यम से किसानों की सभी आवश्यक जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी, जिससे योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान करना आसान होगा। यह प्रणाली विशेष रूप से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना सहित अन्य कृषि योजनाओं के लाभार्थियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। डिजिटल रजिस्ट्री बनने से किसानों को अलग-अलग योजनाओं के लिए बार-बार दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, क्योंकि उनका पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा।


डिजिटल क्रॉप सर्वे से मिल रही सटीक जानकारी

जिले में डिजिटल क्रॉप सर्वेक्षण प्रक्रिया भी तेजी से जारी है। कृषि विभाग के अनुसार अब तक जिले में कुल 71,444 क्रॉप सर्वेक्षण किए जा चुके हैं, जिनमें से 27,498 सर्वेक्षण स्वीकृत हो चुके हैं। इस सर्वेक्षण के तहत मोबाइल ऐप और जीपीएस तकनीक की सहायता से खेतों और फसलों की मैपिंग की जा रही है। इससे किसानों की भूमि के रिकॉर्ड को उनकी फसलों की जानकारी से जोड़ा जा रहा है, जिससे कृषि योजनाओं का लाभ सही किसानों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से कृषि उत्पादन और फसल पैटर्न से जुड़ी सटीक जानकारी भी प्राप्त की जा सकेगी, जो भविष्य की कृषि योजनाओं के निर्माण में सहायक होगी।


लोक मित्र केंद्रों के माध्यम से भी करवा सकते हैं पंजीकरण

कृषि विभाग ने बताया कि जिन किसानों का अभी तक एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हुआ है, वे जल्द से जल्द अपना ऑनलाइन फार्मर रजिस्ट्रेशन करवा लें। किसान अपने नजदीकी लोक मित्र केंद्र के माध्यम से या आधिकारिक पोर्टल पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

पंजीकरण के लिए निम्न दस्तावेज आवश्यक हैं:

  • आधार कार्ड

  • भूमि का खसरा नंबर

  • आधार से लिंक्ड मोबाइल नंबर

यह पूरी प्रक्रिया निःशुल्क है।


किसानों को जागरूक करने के लिए चल रहा अभियान

कृषि विभाग द्वारा किसानों को इस पहल के बारे में जागरूक करने के लिए विभिन्न स्तरों पर अभियान भी चलाए जा रहे हैं। अधिकारियों द्वारा गांवों में जाकर किसानों को डिजिटल किसान रजिस्ट्री के लाभों के बारे में जानकारी दी जा रही है, ताकि अधिक से अधिक किसान इस पोर्टल से जुड़ सकें।


उपायुक्त की किसानों से अपील

जतिन लाल, उपायुक्त ऊना ने जिले के किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे एग्रीस्टैक पोर्टल पर अपना पंजीकरण अवश्य करवाएं। उन्होंने कहा कि डिजिटल किसान रजिस्ट्री बनने से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी और सरल तरीके से प्राप्त होगा। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को इस पहल के प्रति व्यापक रूप से जागरूक किया जाए ताकि कोई भी पात्र किसान इस सुविधा से वंचित न रह जाए।


कृषि क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की दिशा में बड़ा कदम

एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से तैयार की जा रही डिजिटल किसान रजिस्ट्री को कृषि क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल किसानों की जानकारी व्यवस्थित होगी बल्कि कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।