कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना से 6,356 किसानों को मिलेगा लाभ, घुमारवीं में बोले राजेश धर्माणी
प्रदेश सरकार किसानों, बागवानों, पशुपालकों और मछुआरों के कल्याण के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। इसी कड़ी में अब ऐसे किसानों के लिए कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना शुरू की जाएगी, जिनकी कृषि भूमि ऋण के कारण नीलामी के खतरे में है। इस योजना से प्रदेश के 6,356 पात्र किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
यह जानकारी नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने मंगलवार को लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह घुमारवीं में आयोजित जन समस्या निवारण कार्यक्रम के दौरान दी। इस अवसर पर उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकांश मामलों का मौके पर ही समाधान किया। शेष मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
3 लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर मिलेगी राहत
राजेश धर्माणी ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित हालिया मंत्रिमंडल बैठक में कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत सरकार पात्र किसानों के 3 लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर ब्याज देनदारी का 50 प्रतिशत वहन करेगी।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय विशेष रूप से उन किसानों के लिए राहत लेकर आया है जो आर्थिक कठिनाइयों के कारण अपने ऋण का भुगतान करने में परेशानी का सामना कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों की भूमि को नीलामी से बचाना और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।
राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना का चौथा चरण
मंत्री ने बताया कि प्रदेश मंत्रिमंडल ने राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना के चौथे चरण को भी मंजूरी प्रदान कर दी है। इस चरण के तहत पात्र युवाओं को ई-बस खरीदने पर 50 प्रतिशत तथा डीजल बस खरीदने पर 30 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस योजना से युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी। सरकार का लक्ष्य रोजगार सृजन और हरित परिवहन को बढ़ावा देना है।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
राजेश धर्माणी ने कहा कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्राकृतिक रूप से उत्पादित गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 60 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है।
इसके अलावा प्राकृतिक मक्का का एमएसपी 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। वहीं हल्दी का न्यूनतम समर्थन मूल्य 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने पहली बार अदरक के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है, जिसे 30 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है। इस निर्णय से प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को बेहतर आय प्राप्त होगी।
किसानों की आय में हो रहा सुधार
धर्माणी ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने के फैसलों से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। उन्होंने बताया कि जिला बिलासपुर में भी बड़ी संख्या में किसानों को प्राकृतिक रूप से उत्पादित गेहूं का बेहतर मूल्य मिल रहा है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है। सरकार का मानना है कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत कम होती है और उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने से किसानों को अधिक लाभ प्राप्त होता है।

मछुआरों के लिए भी राहत
मंत्री ने कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र को सशक्त बनाने और मछुआरों के कल्याण के लिए मुख्यमंत्री मछुआरा सहायता योजना लागू की गई है। इसके तहत जलाशयों में पकड़ी जाने वाली मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि जलाशयों से पकड़ी गई मछलियों पर रॉयल्टी की दर पहले 15 प्रतिशत थी, जिसे घटाकर साढ़े सात प्रतिशत और अब केवल एक प्रतिशत कर दिया गया है। इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 6,000 जलाशय मछुआरों को लाभ पहुंचा है।
इसके अतिरिक्त ऑफ सीजन के दौरान मछुआरों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए 3,500 रुपये सम्मान निधि का भी प्रावधान किया गया है।
दूध उत्पादकों को भी लाभ
राजेश धर्माणी ने बताया कि पशुपालकों के हित में गाय और भैंस के दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी बढ़ोतरी की गई है। गाय के दूध का एमएसपी 51 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस के दूध का एमएसपी 61 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर किया गया है।
राज्य किसान आयोग के गठन का निर्णय
उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा और कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए प्रदेश सरकार ने राज्य किसान आयोग के गठन का भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह आयोग किसानों की समस्याओं और सुझावों को सरकार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राजेश धर्माणी ने कहा कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों, पशुपालकों, बागवानों तथा मछुआरों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में भी जनहित और किसान हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।