हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बड़ा मुद्दा सामने आया है। जिला सिरमौर के शिलाई क्षेत्र में 300 से अधिक चीड़ के पेड़ों के कथित अवैध कटान को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कड़ा विरोध जताया है। इस मामले को लेकर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई द्वारा कुलपति भवन के बाहर धरना-प्रदर्शन किया गया।
विद्यार्थी परिषद ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताया है। परिषद के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि इस मामले में केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर असली दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई के उपाध्यक्ष अक्षय ठाकुर ने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक बड़े अधिकारियों और कथित ‘वन माफिया’ की भूमिका सामने नहीं आती, तब तक न्याय नहीं होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि परिषद की मांग है कि इस मामले में शामिल सभी दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी घटना प्रशासन की नजरों से कैसे बच गई।
अक्षय ठाकुर ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि एसडीएम कार्यालय और पुलिस थाना से मात्र 500 मीटर की दूरी पर दिन-दहाड़े पेड़ों की कटाई होती रही और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही करार दिया।
विद्यार्थी परिषद ने यह भी कहा कि एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की घटनाएं सरकार के दावों पर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि जंगल, जल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधन पर्यावरण के महत्वपूर्ण घटक हैं, जिनकी रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि विद्यार्थी परिषद “विकासार्थ विद्यार्थी” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही है। परिषद का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की और जल्द कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मामले में जल्द और सख्त कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पर्यावरण से जुड़े इस मुद्दे पर विभिन्न संगठनों और लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में वनों का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस प्रकार के अवैध कटान से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, बल्कि भूस्खलन और जल संकट जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि शिलाई में हुआ यह कथित अवैध कटान केवल एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।