अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अपने स्थापना काल से ही छात्र हितों एवं राष्ट्रीय हितों के प्रति दायित्वपूर्ण छात्र संगठन के रूप में कार्य करते हुए आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की सर्वोच्च नीति निर्धारण संस्था कार्यकारी परिषद (Executive Council) की बैठक में विद्यार्थियों से जुड़े गंभीर एवं लंबे समय से लंबित मुद्दों को मजबूती के साथ उठाया। एबीवीपी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई द्वारा कार्यकारी परिषद के सभी सदस्यों के समक्ष शैक्षणिक अव्यवस्था, प्रशासनिक लापरवाही और बुनियादी सुविधाओं की कमी से संबंधित विस्तृत मांग–पत्र प्रस्तुत किया गया तथा इन समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की गई।
परिषद ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रदेश का प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान है, लेकिन स्पेशल चांस के अंतर्गत लागू लेट कॉलेज कैपेसिटी (LCC) नियम छात्रों के लिए कठिनाई का कारण बन रहा है। एबीवीपी ने मांग की कि इस नियम में संशोधन कर केवल फेल विषयों में ही परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए। एबीवीपी ने विश्वविद्यालय में गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भारी कमी पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे शैक्षणिक व प्रशासनिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। परिषद ने सभी रिक्त गैर-शिक्षक पदों को तुरंत भरने की मांग की।
स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर देते हुए परिषद ने विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केंद्र में दो स्थायी मेडिसिन डॉक्टरों की नियुक्ति, 24×7 सेवाएं, पर्याप्त स्टाफ और दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग रखी। साथ ही, परिसर की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सभी संवेदनशील व प्रमुख स्थानों पर 24×7 सीसीटीवी कैमरे लगाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। एबीवीपी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को विश्वविद्यालय में पूर्ण रूप से लागू करने, पाठ्यक्रमों को समयानुकूल एवं रोजगारोन्मुखी बनाने तथा शोध कार्यों को प्रोत्साहित करने की मांग उठाई। पुस्तकालयों में नई पुस्तकों की उपलब्धता, प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण और शोधार्थियों के लिए बेहतर सुविधाओं पर भी जोर दिया गया।
छात्रावासों की बदहाल स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए परिषद ने नए छात्रावासों के निर्माण, पुराने छात्रावासों की मरम्मत, स्वच्छ पेयजल, बिजली, सफाई व्यवस्था और मेस की गुणवत्ता सुधारने की मांग रखी। विशेष रूप से छात्राओं की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग करते हुए एबीवीपी ने समय पर परीक्षाएं आयोजित करने, परिणाम शीघ्र घोषित करने, पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न डालने की मांग की।
इसके अतिरिक्त परिषद ने खेल, सांस्कृतिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बढ़ावा देने, खेल मैदानों व उपकरणों की उपलब्धता, छात्र कल्याण के लिए पर्याप्त बजट तथा करियर काउंसलिंग व प्लेसमेंट सेल को प्रभावी रूप से संचालित करने पर जोर दिया। इस अवसर पर एबीवीपी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष अक्षय ठाकुर ने कहा कि “हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय हजारों विद्यार्थियों की आशाओं का केंद्र है, लेकिन यहां शिक्षा, सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़े कई गंभीर मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद केवल मांगें नहीं रखती, बल्कि समाधान के ठोस सुझाव भी देती है। यदि जायज मांगों की अनदेखी हुई, तो विद्यार्थी परिषद छात्र हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होगी।”
अंत में एबीवीपी ने आशा व्यक्त की कि कार्यकारी परिषद छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा और छात्र हितों की रक्षा हेतु शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी।
