भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की राज्य कमेटी ने हिमाचल प्रदेश में हो रही भारी वर्षा और उससे जुड़े व्यापक जन-धन नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। पार्टी ने आपदा में जान गंवाने वालों के प्रति शोक संवेदना प्रकट की और प्रभावितों के साथ एकजुटता जताई।
अब तक का नुकसान: सरकार के आंकड़े भयावह
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261 मौतें, 38 लोग लापता
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₹2144 करोड़ का अनुमानित नुकसान
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566 मकान पूरी तरह ध्वस्त, 2385 क्षतिग्रस्त
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360 दुकानें, 2174 गौशालाएं नष्ट
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1626 पशुओं व 25,755 पोल्ट्री पक्षियों की मौत
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पेयजल, बिजली व सड़कें ठप
कई जिले सबसे अधिक प्रभावित
मंडी, कुल्लू, शिमला, कांगड़ा, सिरमौर, ऊना व चंबा जिलों में हालात अत्यंत गंभीर हैं। राजधानी शिमला समेत पूरे प्रदेश में पेयजल योजनाएं बंद, राष्ट्रीय उच्च मार्ग अवरुद्ध, और किसानों की फसल मंडियों तक नहीं पहुंच पा रही है।
किसानों को भारी नुकसान
रास्ते बंद होने से सेब और अन्य फसलें सड़ने की कगार पर हैं। पार्टी ने सरकार से मांग की कि वह क्षतिग्रस्त क्षेत्रों में खुद जाकर फसल खरीद की व्यवस्था करे और किसानों को राहत दे।
राहत कार्य धीमा, कई गाँव अब भी कटे हुए
सीपीआईएम ने कहा कि कई प्रभावित क्षेत्रों में आज भी प्रशासन नहीं पहुंच पाया, राशन और दवाओं की आपूर्ति बाधित है, और स्वास्थ्य सेवाएं ठप हैं।
CPIM की प्रमुख मांगें
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केंद्र सरकार आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करे और ₹3000 करोड़ की राहत तुरंत दे
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राज्य सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाकर साझा रणनीति बनाए
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टास्क फोर्स बनाकर सभी विभागों में तालमेल से राहत कार्य
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मृतकों के परिजनों को पर्याप्त राहत राशि दी जाए
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लापता लोगों को ढूंढने के लिए NDRF व SDRF की मदद ली जाए
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जिनके मकान ढहे, उन्हें अस्थायी आवास या सरकार द्वारा किराये पर मकान उपलब्ध करवाया जाए
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किसानों की फसल मंडियों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए, जरूरत पड़े तो सरकार सीधी खरीद करे
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राशन, दवाओं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए
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सड़कों, बिजली और जल योजनाओं की युद्धस्तर पर बहाली हो
पार्टी का सहयोग और अपील
सीपीआईएम राज्य कमेटी ने कहा कि पार्टी सभी राहत कार्यों में पूरा सहयोग करेगी। सभी स्थानीय कमेटियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रभावित क्षेत्रों में जनता के साथ मिलकर राहत कार्य करें। पार्टी ने जनता से भी अपील की है कि इस संकट में एकजुट होकर मदद करें और ज़रूरत पड़ने पर पार्टी कार्यकर्ताओं से संपर्क करें।