ऊना || 1 अगस्त 2025 || गांव की पगडंडियों से होकर अब आधुनिक चिकित्सा सेवा सीधे खेत-खलिहानों तक पहुंच रही है। ऊना जिले में संचालित मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा अब तक 2,076 मवेशियों का निःशुल्क उपचार उनके घर-द्वार पर कर चुकी है। ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों के लिए यह सेवा किसी वरदान से कम नहीं है। मार्च 2024 में शुरू की गई इस सेवा का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालन क्षेत्र को सशक्त बनाना है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार लगातार इस बात पर बल दे रही है कि मूलभूत सुविधाएं गांव-गांव तक पहुंचे। मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा इसी सोच का परिणाम है और इसका सकारात्मक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
हरोली, बंगाणा और ऊना क्षेत्रों में सक्रिय तीन यूनिटें
पशुपालन विभाग ऊना के उपनिदेशक डॉ. दिनेश परमार के अनुसार, वर्तमान में जिले में तीन मोबाइल वैन यूनिटें कार्यरत हैं। इनमें:
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हरोली यूनिट ने 611 मवेशियों का इलाज किया,
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बंगाणा यूनिट ने 757 मवेशियों का उपचार किया,
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जबकि ऊना यूनिट ने 708 मवेशियों को राहत पहुंचाई।
टोल-फ्री सेवा: 1962 पर करें कॉल
डॉ. परमार ने बताया कि इस सेवा का लाभ उठाने के लिए पशुपालक टोल फ्री नंबर 1962 पर कॉल कर सकते हैं। यह सेवा प्रत्येक दिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक उपलब्ध रहती है। तीन सदस्यीय टीम, जिसमें एक पशु चिकित्सक, वेटनरी सहायक और फार्मासिस्ट शामिल होते हैं, मौके पर पहुंचकर निःशुल्क इलाज करती है। यह सेवा बेसहारा मवेशियों के लिए भी प्रभावी साबित हो रही है।
पशुपालकों की प्रतिक्रियाएं: समय पर मिली राहत
इस सेवा से लाभान्वित पशुपालकों ने सरकार की पहल की सराहना की है।
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जलग्रां के लखविन्द्र सिंह की भैंस के टूटे सींग का इलाज,
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लाल सिंगी के सुरजीत सिंह की भैंस का एनोरेक्सिया,
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कर्मपुर के जगदीश के मवेशी का बुखार और भूख न लगना,
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गोंदपुर बुल्ला के चंद्र मोहर के मवेशी का स्तन संक्रमण,
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भदसाली की किरना देवी के मवेशी की प्रसवोत्तर कमजोरी,
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और अंदौरा के राकेश कुमार की गाय के त्वचा रोग जैसी समस्याओं का सफल और समय पर इलाज मोबाइल वैन के माध्यम से किया गया।
बंगाणा क्षेत्र की यूनिट ने भी थेलेरियोसिस, पेट फूलना, घाव, दस्त जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मवेशियों का जीवन रक्षक उपचार किया है।
ग्राम अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बना रही सेवा
उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने कहा कि यह सेवा न केवल पशुओं को समय पर और सुलभ चिकित्सा प्रदान कर रही है, बल्कि पशुपालकों को अस्पताल तक मवेशी ले जाने की परेशानी से भी मुक्ति दिला रही है। यह पहल गांवों की आर्थिक स्थिति को मजबूती दे रही है और पशुपालन को अधिक सुरक्षित एवं टिकाऊ बना रही है।