नाहन : चुनावी जनसभा को संबोधित करने नाहन पहुंचे राहुल गांधी ने कुल 30 मिनट भाषण दिया. संबोधन के दौरान उन्होंने कई बार मीडिया पर खूब भड़ास निकाली. जिक्र मोदी और अडानी का करते, लेकिन भांडा मीडिया पर फोड़ते।

उन्होंने कहा कि अडानी के संरक्षण में मीडिया गोदी मीडिया बन चुका है, जो पीएम मोदी से देश के असल मुद्दों पर सवाल पूछने की बजाय अरबपतियों की रईसी दिखाने में मशगूल हैं। कोई मोदी से पूछता है कि आप आम कैसे खाते हैं तो कोई रईसजादों की शादियां कैसे हो रहीं, वो दिखा रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि मीडिया अपनी क्रेडिबिलिटी खो चुका है।

उन्होंने कवरेज कर रहे मीडिया कर्मियों को मंच से कोसते हुए कहा कि वह मीडिया के बारे में जो कुछ भी कह रहे हैं, उन्हें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वह जनता से सीधा संवाद करने यहां पहुंचे हैं। देश में नोटबंदी हुई, जीएसटी और किसानों जैसे अन्य कई बड़े मुद्दों पर मीडिया पूरी तरह खामोश रही। कोई भी किसानों की समस्याओं को नहीं उठाता और न ही इस पर मोदी से सवाल पूछे जाते।

हैरानी इस बात की है कि गोदी मीडिया पर तंज कसते हुए राहुल ने उनकी कवरेज करने पहुंचे मीडिया कर्मियों को भी निशाने पर ले लिया। इससे मौके पर मौजूद पत्रकार भी स्तब्ध रह गए। बावजूद इसके पत्रकारों ने राहुल गांधी की इस बात को नजरअंदाज करते हुए उनकी कवरेज को जारी रखा।

इस बात को लेकर वरिष्ठ पत्रकारों ने कहा कि गेहूं के साथ घुण भी पिस रहा है। राहुल गांधी अगर गोदी और बिकाऊ मीडिया को कोसने के साथ निष्पक्ष मीडिया के प्रति सराहना के दो शब्द कहे देते तो उनका और मान बढ़ता।

रैली में दिखा अव्यवस्थाओं का आलम

कांग्रेस की चुनावी जनसभा में आज भारी अव्यस्थाएं देखने को मिलीं। आलम ये था कि कवरेज के लिए पहुंचे स्थानीय पत्रकारों को भी खासी दिक्कतें झेलनी पड़ीं। हैरानी इस बात की रही कि फट्टे और टूटे-फूटे मेज रखकर मीडिया गैलरी बनाई गई। जहां बैठने के लिए एक भी कुर्सी का इंतजाम नहीं था न ही पर्याप्त जगह की व्यवस्था थी। पत्रकारों की इस भीड़ में कवरेज करने के लिए कैमरे चलाने तक मुश्किल हो गए।

पत्रकारों को जनसभा की पूरी कवरेज खड़े होकर करनी पड़ी। प्रचंड गर्मी के बीच पसीने से लथपथ पत्रकारों को पानी तक के लिए नहीं पूछा गया। न ही पंखे की व्यवस्था की गई। हैरानी इस बात की भी है कि मीडिया गैलरी के ठीक सामने बैठे कांग्रेस के कई मंत्री, वरिष्ठ व स्थानीय नेता इस आलम को घंटों देखने के बावजूद मूक दर्शक बने रहे।

इस दौरान मौजूद पत्रकारों ने अव्यवस्थाओं को लेकर आयोजकों को भी बार-बार अवगत कराया, लेकिन सभी ने बात अनसुना कर दी। इसके बाद रही सही कसर राहुल गांधी के मीडिया विरोधी भाषण ने पूरी कर दी।

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