हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में प्रदेश व विश्वविद्यालय स्तरीय मांगों को लेकर हस्ताक्षर अभियान :ABVP

शिमला || 25 जुलाई 2025 ||  अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में छात्रों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर एक हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। यह अभियान विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में चलाया गया और प्रदेश स्तर की मांगों को लेकर छात्रों में जागरूकता फैलाने और प्रशासन व सरकार तक उनकी आवाज पहुँचाने हेतु शुरू किया गया।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई इकाई मंत्री आशीष शर्मा ने बताया आज विश्वविद्यालय में प्रदेश व विश्वविद्यालय स्तर की प्रमुख मांगों को लेकर विश्वविद्यालय में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। सबसे पहले जॉब ट्रेनी नीति जो छात्र विरोधी व युवा विरोधी नीति है प्रदेश सरकार जल्द से जल्द इसे वापिस ले। यह नीति छात्रों का शोषण करने वाली है इस नीति के माध्यम से सरकार चयनित उम्मीदवारों को केवल “ट्रेनिंग” की आड़ में अनुबंध पर रखती है ताकि यह दिखाया जा सके कि अभी नियमित नियुक्ति नहीं हुई है। इससे सरकार को कानूनी दायित्वों से बचने का रास्ता मिल जाता है। इस तथाकथित प्रशिक्षण अवधि का उद्देश्य साफ है—कोर्ट में यह तर्क देना कि नियुक्ति अस्थायी है, और इस प्रकार चयनित उम्मीदवारों को संवैधानिक अधिकारों जैसे स्थायित्व, सेवा लाभ, वेतनमान और सामाजिक सुरक्षा से वंचित रखा जाए।

आशीष शर्मा ने बताया इस दोहरी नीति के कारण चयनित अधिकारी असुरक्षा, भ्रम और मानसिक दबाव की स्थिति में आ जाते हैं। वे पूर्णकालिक ज़िम्मेदारियाँ निभाते हैं, जनता के साथ सीधे संवाद करते हैं, प्रशासनिक निर्णय लेते हैं—लेकिन सरकार उन्हें स्थायी सेवक मानने से इनकार कर देती है। यह नीतिगत ढोंग और प्रशासनिक तिकड़म योग्यता की नहीं, बल्कि युवाओं की मजबूरी की मार है। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि वह चयन प्रक्रिया का सम्मान करती है या उसे केवल एक कानूनी औजार मानती है। यदि चयनित उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा के लिए बाध्य किया जाता है, तो HPPSC की परीक्षा का औचित्य ही खत्म हो जाता है। यह स्थिति युवाओं को गुमराह करती है और एक स्थायी नौकरी की उम्मीद को एक अस्थायी अनुबंध में तब्दील कर देती है। विद्यार्थी परिषद सरकार से मांग करती हैं कि वह इस दोहरी नीति को तुरंत वापस ले, चयनित उम्मीदवारों को प्रशिक्षण के नाम पर ठेके पर रखने की परंपरा समाप्त करे, और नियुक्ति के दिन से ही उन्हें नियमित सेवक के रूप में मान्यता दे। यह केवल प्रशासनिक सुधार की बात नहीं है, यह न्याय, संवैधानिक मूल्यों और युवाओं के भविष्य का सवाल है। अगर सरकार वाकई योग्यता का सम्मान करती है, तो उसे चयन प्रक्रिया को औपचारिकता नहीं, एक वैध और पूर्ण निर्णय मानना होगा। वरना यह नीति योग्यता का नहीं, शोषण का प्रतीक बनकर रह जाएगी। और प्रमुख मांगे जैसे छात्रो के लोकतांत्रिक अधिकार छात्र संघ चुनाव को शीघ्र बहाल करने पर ज़ोर दिया । राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 को अति शीघ्र सुचारू रूप से लागू किया जाए ।विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए नई बसों की सुविधा की माँग इस हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से रखी गई ।लंबे समय से पर्याप्त संख्या में बसों की सुविधा न होने के कारण छात्र काफ़ी परेशानियों का सामना रोजाना करते है । लगभग सात से आठ हज़ार छात्र विश्वविद्यालय पढ़ने आते है लेकिन सिर्फ तीन बसें विश्वविद्यालय में सेवा में है |

विश्वविद्यालय में कम छात्रावास होने के कारण अत्यधिक मात्रा में छात्र किराए का कमरा लेकर विश्वविद्यालय के आसपास के क्षेत्र में रह रहे है जिसके लिए विद्यार्थी परिषद ने नए छात्रावासों के निर्माण की मांग उठाई है व प्रदेश के विभिन्न विभागों में पड़े रिक्त पदों को शीघ्र से शीघ्र भरा जाए। प्रदेश में खनन माफिया व नशा तस्करों पर नकेल कसी जाएं व साथ ही बिगड़ती कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए यह मांगे हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से रखी। इस हस्ताक्षर अभियान का मुख्य उद्देश्य छात्रों की एकजुटता को दर्शाना और सरकार व विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाकर छात्रहित में सकारात्मक निर्णय करवाना है। ABVP का यह प्रयास छात्रों के अधिकारों की रक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण की स्थापना की दिशा में एक मजबूत कदम है।

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