शहीद भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु के 94वें बलिदान दिवस पर सीटू, किसान सभा, महिला समिति, एसएफआई, डीवाईएफआई, एआईएलयू आदि संगठनों ने शिमला के कालीबाड़ी हॉल में एक सेमिनार का आयोजन किया। सेमिनार को डॉ ओंकार शाद, राकेश सिंघा व विजेंद्र मेहरा ने सम्बोधित किया। सेमिनार में डॉ ओंकार शाद, राकेश सिंघा, विजेंद्र महद, जगत राम, संजय चौहान, फालमा चौहान, सत्यवान पुंडीर, संजीव भूषण, निरंजन वर्मा, दलीप कायथ, सुरेंद्र वर्मा, सोनिया, दिनित देंटा, कमल, कपिल, अमित ठाकुर सहित सैकड़ों लोग मौजुद रहे। सेमिनार के बाद कार्यकर्ताओं ने कालीबाड़ी से रिज स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा तक एक मोमबती जुलूस का आयोजन किया गया।
सेमिनार को सम्बोधित करते हुए डॉ ओंकार शाद, राकेश सिंघा व विजेंद्र मेहरा ने कहा कि शहीद भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु के विचार वर्तमान दौर में और ज़्यादा प्रासंगिक हो गए हैं जब अंग्रेजों का साथ देने वाली आरएसएस की विचारधारा केंद्र में मोदी के नेतृत्व में सत्तासीन है। मोदी सरकार देश के लोकतंत्र व संविधान को खत्म करने पर तुली हुई है। इस देश में कॉरपोरेट व साम्प्रदायिक गठजोड़ के कारण तानाशाही स्थापित हो रही है। उन्होंने कहा कि मजदूर किसान व जनता विरोधी मोदी सरकार को 2024 के लोकसभा चुनाव में सत्ता से बेदखल करके ही देश की जनता को उनके कष्टों से मुक्ति संभव है। उन्होंने कहा है कि केन्द्र की मोदी सरकार की नवउदारवादी व पूंजीपति परस्त नीतियों के कारण बेरोजगारी, गरीबी, असमानता व रोजी रोटी का संकट बढ़ रहा है। बेरोजगारी व महंगाई से गरीबी व भुखमरी बढ़ रही है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कमज़ोर करने के कारण बढ़ती मंहगाई ने जनता की कमर तोड़ कर रख दी है।

उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र व संविधान पर हमले बढ़ रहे हैं। इलेक्टोरल बॉन्ड घोटाला करने वाली मोदी सरकार पूरी तरह अमीरों के साथ खड़ी हो गयी है व देश की आज़ादी के शहीदों के सपनों को चकनाचूर कर रही है। कॉरपोरेट साम्प्रदायिक गठजोड़ के चलते गरीब और ज़्यादा गरीब हो रहे हैं तथा धर्म के नाम पर देश की एकता व अखण्डता को खत्म किया जा रहा है। मजदूर विरोधी चार लेबर कोडों से मजदूरों पर बंधुआ मजदूरी थोपी जा रही है। स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशें लागू न करके किसानों को दयनीय स्थिति में धकेला जा रहा है। किसानों के लिए एमएसपी लागू करने के बजाए मोदी सरकार किसानों का दमन कर रही है। किसानों के कर्ज़े माफ नहीं किये जा रहे हैं जबकि पूंजीपतियों के सत्रह लाख करोड़ के कर्जे माफ कर दिए गये हैं। फिक्स टर्म रोज़गार व बारह घण्टे की डयूटी मजदूरों पर थोप कर पूंजीपतियों का मुनाफा बढ़ाया जा रहा है। भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के बावजूद मजदूरों को 26 हज़ार न्यूनतम वेतन लागू नहीं किया जा रहा है। नई शिक्षा नीति से छात्र शिक्षा के वंचित हो रहे हैं। बढ़ती बेरोजगारी पर रोक लगाने के बजाए मोदी सरकार जुमलेबाजी में व्यस्त है। महिला हिंसा, अत्याचार, शोषण व दमन पर रोक लगाने में केंद्र सरकार पूरी तरह विफल रही है। दलितों का शोषण व दमन इस सरकार के कार्यकाल में बढ़ा है। शहीद भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु ने ऐसे भेदभावपूर्ण समाज की कभी कल्पना भी नहीं कि होगी। मोदी सरकार ने शहीदों के सपनों के भारत को नुकसान पहुंचाने का कार्य किया है।