लोकसभा में हिमाचल की खेल अवसंरचना का मुद्दा उठा

rakesh nandan

11/03/2026

लोकसभा में हिमाचल की खेल अवसंरचना का मुद्दा उठा

सुरेश कश्यप ने लोकसभा में हिमाचल प्रदेश विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में खेल अवसंरचना के विकास, खिलाड़ियों की पहचान और प्रशिक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि खेलो इंडिया नीति 2025 के अंतर्गत हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्यों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए क्या विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं। सांसद ने यह भी जानना चाहा कि प्रदेश के खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार किस प्रकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर कार्य कर रही है।


खेलो इंडिया नीति का उद्देश्य

सांसद के प्रश्न का उत्तर देते हुए मनसुख मांडविया ने बताया कि खेलो इंडिया नीति–2025 का मुख्य उद्देश्य देश में एक मजबूत, समावेशी और प्रदर्शन आधारित खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है। उन्होंने कहा कि इस नीति के माध्यम से देशभर में खेल अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने, प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने और उन्हें उच्च स्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।


खेल राज्य का विषय

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि खेल राज्य सूची का विषय है, इसलिए खेल अवसंरचना के विकास की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है। हालांकि केंद्र सरकार अपनी विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करती है, ताकि खेल सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सके।


हिमाचल में 18 खेलो इंडिया केंद्र संचालित

मंत्री ने जानकारी दी कि खेलो इंडिया योजना के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश के 12 जिलों में कुल 18 खेलो इंडिया केंद्र (Khelo India Centres – KIC) संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों में लगभग 280 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन खिलाड़ियों को पूर्व ओलंपियन खिलाड़ियों और अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की तैयारी करवाई जा रही है।


खेल अवसंरचना को मिल रही वित्तीय सहायता

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि खेलों के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय खेल विकास निधि (NSDF) तथा खेलो इंडिया योजना के माध्यम से देशभर में खेल अवसंरचना के निर्माण और उन्नयन के लिए सहयोग दिया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना और खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर देना है।


हिमाचल में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं

सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं, आधुनिक प्रशिक्षण और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं।


पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष रणनीति जरूरी

सांसद ने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए विशेष रणनीति की आवश्यकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में खेल अवसंरचना विकसित करने में भौगोलिक चुनौतियां भी होती हैं, इसलिए इन राज्यों के लिए विशेष योजनाएं बनाना आवश्यक है।


खेल विकास के प्रयासों की सराहना

सांसद ने केंद्र सरकार द्वारा खेलों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में हिमाचल प्रदेश में खेल अवसंरचना और प्रशिक्षण सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा, जिससे प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिलेगा।


युवाओं को मिलेंगे बेहतर अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि खेलो इंडिया जैसी योजनाएं देश में खेल प्रतिभाओं को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के युवाओं को भी खेलों में आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं।