फॉल आर्मी वर्म से मक्की के बचाव के लिए करें कौराजेन का स्प्रे

rakesh nandan

23/07/2025

ऊना, 22 जुलाई 2025 || इस समय खरीफ सीजन की प्रमुख फसल मक्की फॉल आर्मी वर्म के खतरे का सामना कर रही है, जो किसानों के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है। यह कीट रातों-रात फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में, हिमाचल सरकार ने कृषि विभाग को किसानों के लिए त्वरित और प्रभावशाली कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

**मक्की की सुरक्षा के लिए उपाय:**

कृषि विभाग के पास मक्की की सुरक्षा के लिए कौराजेन और क्लोरपायरीफास 20 ई. सी. कीटनाशक सभी विकास खंडों में उपलब्ध हैं। कौराजेन का स्प्रे विभागीय अधिकारियों के परामर्श अनुसार मक्की के पत्तों के भंवर में सुबह के शुरुआती घंटों में या शाम के समय किया जाना चाहिए। स्प्रे नोजल को पत्तियों की भंवर की ओर रखा जाना चाहिए, जहां लार्वा आमतौर पर फीड करते हैं।

**फॉल आर्मी वर्म की पहचान:**

कृषि विभाग के उप-निदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप खरीफ मक्का फसल में अधिक देखने को मिलता है। इसकी व्यस्क मादा मोथ पौधों की पत्तियों और तनों पर 50 से 200 अण्डे देती है, जो 3-4 दिन में फूटते हैं। लार्वा 14-22 दिन तक सक्रिय रहता हैं, और चौथी अवस्था में उसकी पहचान आसानी से की जा सकती है। चौथी अवस्था के लार्वा के सिर पर अंग्रेजी के उल्टे ‘वाई’ आकार का सफेद निशान होता है, जो पत्तियों को खुरचकर खाता है और सफेद धारियां छोड़ता है।

 

उप-निदेशक ने चेतावनी दी कि यदि फॉल आर्मी वर्म की पहचान और नियंत्रण समय पर नहीं किया गया, तो मक्का और अन्य फसलों में भारी तबाही हो सकती है। लार्वा अवस्था फसल के लिए हानिकारक होती है, इसलिए कीट के सम्पूर्ण नियंत्रण के लिए इसके जीवन काल की सभी अवस्थाओं को नष्ट करना जरूरी है।

 

**कद्दूवर्गीय फसलों में फल शेदक मक्खी:**

डॉ. कुलभूषण ने बताया कि कद्दूवर्गीय फसलों जैसे लौकी, ककड़ी, करेला आदि में फल शेदक मक्खी का प्रकोप आम होता है। यह मक्खी फलों के अंदर अंडे देती है जिससे फल सड़ने लगते हैं और बाजार में बेचने लायक नहीं रहते। उन्होंने fruit fly trap का उपयोग करने की सलाह दी, जो एक पर्यावरण अनुकूल और रसायन मुक्त उपाय है, जिससे फलों पर कीटनाशक का अवशेष नहीं रहता।

 

**फ्रूट फ्लाई ट्रेप के लाभ:**

– रसायन मुक्त समाधान है।

– फलों पर कीटनाशकों का अवशेष नहीं रहता।

– बार-बार स्प्रे करने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे लागत कम आती है।

– पर्यावरण और मधुमक्खियों के लिए सुरक्षित है।

– उपज और गुणवत्ता दोनों को बरकरार रखता है।

 

**जानकारी के लिए सम्पर्क:**

किसान अधिक जानकारी के लिए निम्नलिखित विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं:

– विकास खंड अम्ब: प्यारो देवी, मोबाइल नं. 86289-45916

– विकास खंड बंगाणा: सतपाल धीमान, मोबाइल नं. 94181-60124

– विकास खंड गगरेट: नवदीप कौंडल, मोबाइल नं. 82191-70865

– विकास खंड हरोली: श्याम लाल, मोबाइल नं. 98053-06198

– विकास खंड ऊना: डॉ. खुशबू राणा, मोबाइल नं. 82196-16530

 

किसानों से अनुरोध किया गया है कि वे समय रहते उचित उपाय करें ताकि उनकी फसल सुरक्षित रह सके।

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