शिमला || 2 अगस्त 2025 || भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने हिमाचल प्रदेश कांग्रेस सरकार की चार दिवसीय महामंथन मंत्रिमंडल बैठक में प्रदेश में लॉटरी पुनः शुरू करने के निर्णय की तीव्र आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण फैसला हिमाचल प्रदेश को केवल विनाश की ओर ले जाएगा।
प्रो. धूमल ने कहा कि 17 अप्रैल 1996 को उच्च न्यायालय ने प्रदेश में चल रही सिंगल डिजिट लॉटरी की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद 1999 में जब वे मुख्यमंत्री थे, तब भाजपा सरकार ने सर्वसम्मति से हिमाचल प्रदेश में लॉटरी प्रणाली बंद करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। उनका कहना था कि यह निर्णय केवल प्रशासनिक नहीं था, बल्कि पूरे प्रदेश को बर्बादी से बचाने की दूरदर्शी सोच थी।
उन्होंने बताया कि उस समय लॉटरी की आदत से अनेक कर्मचारी, सेवानिवृत्त कर्मचारी, मजदूर और युवा प्रभावित हो रहे थे, जिनकी सैलरी, पेंशन और बचत लॉटरी में गंवाने से कई परिवार तबाह हो गए थे। इसलिए जनहित में यह प्रणाली बंद की गई थी।
प्रो. धूमल ने यह भी बताया कि 2004 में कांग्रेस सरकार ने लॉटरी पुनः शुरू की थी, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बाद में इस प्रणाली पर पुनः प्रतिबंध लगा दिया था, जो इस प्रणाली की हानिकारक प्रकृति को दर्शाता है।
उन्होंने वर्तमान स्थिति की ओर इशारा करते हुए कहा कि प्रदेश में लगभग 2,31,180 कर्मचारी हैं, जिनमें से 1,60,000 पक्के कर्मचारी हैं, और 9 से 10 लाख बेरोजगार युवाओं के लिए यह लॉटरी एक बड़ा खतरा है जो उनके जीवन को दांव पर लगा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही लाखों युवाओं को पक्की नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन अब हिमाचल प्रदेश नशे और लॉटरी का गढ़ बनता जा रहा है।
भाजपा इस जनविरोधी निर्णय की कड़ी निंदा करती है और सरकार से आग्रह करती है कि इसे तत्काल वापस लिया जाए ताकि प्रदेश की जनता और युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।