पशु कल्याण पखवाड़ा 23-2024 14 जनवरी से 30 जनवरी तक समस्त भारत में मनाया गया। इसके अन्तर्गत पशुओं के प्रति संवेदना एवं पशु कल्याण के प्रति जागरुकता का प्रसार राष्ट्रीय स्तर पर जन मानस में किया जाना इस अभियान का लक्ष्य रखा गया था।
पशु पालन विभाग ज़िला सिरमौर द्वारा भी बढ़ चढ़ कर इस सन्दर्भ में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं जिनके अन्तर्गत विद्यार्थियों, पशु-पालकों, भेड़ पालकों, ग्रामीण युवाओं को पशु कल्याण से संबन्धित विभिन्न जानकारियाँ प्रदान गईं।
इसी अभियान के तहत 29 जनवरी 2024 को पशु चिकित्सालय नैहली- धीड़ा में कार्यरत पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ऋतिका गुप्ता द्वारा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (बाल) नाहन के विद्यार्थियों तथा D.I.E.T. नाहन में अध्ययनरत J.B.T. / D.L.Ed. के विद्यार्थियों को तथा 30 जनवरी 2024 को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (कन्या) नाहन की छात्राओं को पशु कल्याण तथा पशुओं के प्रति संवेदनशीलता के बारे में जागरुक किया गया। इसमें पशुओं को पाँच स्वतन्त्रताएं सुनिश्चित करना जैसे कि भूख व प्यास से मुक्ति, उचित वातावरण प्रदान कर के असुविधा से मुक्ति, दर्द, चोट व बीमारी से मुक्ति, सामान्य व्यवहार व्यक्त करने की स्वतन्त्रता तथा भय और संकट से मुक्ति प्रदान करना आता है।
इसके अतिरिक्त पशु क्रूरता क्या है, क्या-क्या गतिविधियाँ पशु क्रूरता में आती हैं जैसे कि पशु को भूखा-प्यासा रखना, तंग जगह पर बांधना, मारना-पीटना तथा कष्ट पहुंचाना, पशु की क्षमता से अधिक एवं घायल व बूढ़े पशु से कार्य लेना, भारी चेन से बांधना, मनोरंजन हेतु लड़ने के लिए उकसाना, इलाज से वंचित रखना, अनुचित, गलत या अवैज्ञानिक इलाज करवाना एवं अनाधिकृत एवं अपंजीकृत व्यक्ति से इलाज करवाना, आवश्यकता से अधिक पशुओं को गाड़ी में ढोना एवं पशुओं को बेसहारा या आवारा छोड़ना। ये सभी कार्य पशु क्रूरता में आते हैं तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (P.C.A.) 1960 के तहत दण्डनीय अपराध हैं।
ज़िला स्तर पर इन जागरुकता कार्यक्रमों के व्यापक प्रचार एवं प्रसार के साथ ही 30 जनवरी 2024 को इस पशु कल्याण पखवाड़े का समापन हुआ।
