दलित शोषण मुक्ति मंच हिमाचल प्रदेश के राज्य संयोजक जगत राम एवं सह संयोजक आशीष कुमार ने जारी एक प्रेस ब्यान मे आरोप लगाया कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार भी भाजपा के मनुवादी एजेंडा को लागु कर रही है। , दलित शोषण मुक्ति मंच के राज्य संयोजका जगत राम और सह संयोजक आशीष कुमार ने कहा की भाजपा सरकार और कांग्रेस के क्रिया कलापों मे कोई अंतर नहीं। ,आशीष कुमार ने कहा की विपक्ष मे रहते हुए कोई भी सरकार हो वो दलित अधिकारों की बात सिर्फ वोट बटोरने के लिए करती है , परन्तु सत्ता मे आने के बाद कोंग्रेस ने भी भाजपा के मनुवादी एजेंडा को लागु करने मे लगी है।
राज्य संयोजक जगत राम और सह संयोजक आशीष कुमार ने कहा की हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी भाजपा के नक्शे कदम पर चलते हुए आरक्षित वर्गों के हकों पर सुनियोजित ढंग से डाका डाल रही है। दलित शोषण मुक्ति मंच का मानना है की ये मामला आरक्षण और दलित वर्ग को संविधान के तहत मिलने वाले अधिकारों का है और इन अधिकारों की रक्षा के लिए दलित शोषण मुक्ति मंच पीछे नहीं हटेगा।
प्रेस को जारी बयान में राज्य संयोजक जगत राम और सह संयोजक आशीष कुमार ने कहा की वर्तमान हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा वन विभाग में 2061 वन मित्र पदों को भरने की मंजूरी दी है, लेकिन हैरानी की बात है कि इन पदों के लिए एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण का कोई प्रावधान हीं नहीं रखा गया है। इसलिए दलित शोषण मुक्ति मंच इसका कड़ा विरोध करता है। दलित शोषण मुक्ति मंच के राज्य नेतृत्व ने कहा कि यह संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
दलित शोषण मुक्ति मंच ने कहा की ये पहले भी कई प्रकार की भरतियों मे होता रहा है , इससे पूर्व भी पैट , एस एम सी और आउटसोर्स पर भी अनुसूचित जाति वर्ग, OBC वर्ग की अनदेखी की जाती रही है जोकि बर्दाश्त नहीं की जायेगी दलित शोषण मुक्ति मंच का मानना है की ये दलित वर्गों की भागीदारी को समाप्त किया जा रहा है । दलित शोषण मुक्ति मंच इस संबंध में सरकार से अनुरोध करता है कि संविधान के अनुसार तथा रोस्टर को लागू करके इन भर्तियों को किया जाए, ताकि वंचित वर्गों को उनका हक मिल सके और समानता की अवधारणा भी बनी रहे। वन मित्र पदों को भरने के लिए अंक प्रणाली को रखने की कवायद चल रही है, जोकि जायज नहीं है । दलित शोषण मुक्ति मंच का मानना है की प्रदेश सरकार का चोर दरवाजे से अपने चहेतों को नौकरी पर रखने का सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा रहा है। दलित शोषण मुक्ति मंच इसका कड़ा विरोध करता है।
दलित शोषण मुक्ति मंच के राज्य संयोजक जगत राम और सह संयोजक आशीष कुमार ने कहा कि वन मित्र के प्रस्तावित 2061 पदों में करीब तीन सौ से ज्यादा अनुसूचित जाति, इतने ही ओबीसी, करीब 150 पद अनुसूचित जन जाति के भरे जाने हैं। ऐसे में सरकार ने जो गलत कदम उठाया है, दलित शोषण मुक्ति मंच इसका कड़ा विरोध करेगा। दलित शोषण मुक्ति मंच ने साफ शब्दों में कहा है कि अनुसूचित जाति जनजाति और obc वर्ग को रोस्टर प्रक्रिया के आधार पर अपने अधिकार चाहिए । अंको के मायाजाल में उलझा कर दलित वर्ग को ठगने का काम कर रही है सरकार और यही काम पिछली भाजपा सरकार ने भी मल्टी टास्क वर्कर्स की भर्ती में किया । जिसका नतीजा सबके सामने है। दलित शोषण मुक्ति मंच
सरकार से मांग करता है कि इन भर्तियों में रोस्टर को लागू करके जितनी हिस्सेदारी आरक्षित वर्गों की बनती है,उनको आरक्षण देकर भर्ती किया जाए। दलित शोषण मुक्ति मंच के राज्य नेतृत्व ने कहा की सरकार इस अधिसूचना को रद्द करे और आरक्षण रोस्टर लागु करें अन्यथा दलित शोषण मुक्ति मंच आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेगा ।