पड़दूनी स्कूल बंद करने के फैसले के विरोध में एडीएम को सौंपा ज्ञापन

डॉ. बिंदल बोले – “शहीद का अपमान और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़”

नाहन || 02 अगस्त 2025 || हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा चल रहे स्कूलों को बंद करने की प्रक्रिया के तहत गिरिनगर के ऐतिहासिक पड़दूनी स्कूल को बंद करने के आदेश के खिलाफ स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। वर्ष 1967 से संचालित यह स्कूल गिरिनगर पावर हाउस के सहयोग से चलता आ रहा है और इसमें तीन से चार पंचायतों के बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

स्कूल की विशेषता यह है कि वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर सपूत कुलविंदर सिंह ने भी इसी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। उनकी शहादत के बाद स्कूल का नाम उनके सम्मान में रखा गया था। अब इस स्कूल को बंद करने के फैसले को लोग शहीद के सम्मान का अपमान मान रहे हैं।

इसी मुद्दे को लेकर शनिवार को जिला मुख्यालय नाहन में स्थानीय ग्रामीणों, महिलाओं और पंचायत प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल के नेतृत्व में एडीएम सिरमौर एल.आर. वर्मा को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।

डॉ. राजीव बिंदल ने सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा,

“वर्तमान सरकार बिना किसी तर्क के वर्षों से चल रहे संस्थानों को बंद कर रही है। यह स्कूल शहीद के नाम पर है, इसकी अपनी जमीन और भवन है, और वर्तमान में इसमें 88 बच्चे पढ़ रहे हैं। इसे बंद करना शहीदों का अपमान और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। हम इसका डटकर विरोध करेंगे।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार विशेष रूप से नाहन क्षेत्र के साथ भेदभाव कर रही है और कांग्रेस नेताओं की चुप्पी इस मुद्दे पर दुर्भाग्यपूर्ण है।

स्थानीय पंचायत प्रधानों और निवासियों ने भी सरकार से स्कूल बंद करने के निर्णय को तुरंत वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि यह स्कूल न केवल शिक्षा का केंद्र है बल्कि स्थानीय पहचान और शहीद की विरासत से जुड़ा हुआ है।

ग्रामीणों की यह मांग है कि सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करे और स्कूल को पूर्ववत जारी रखे।

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