एच. आई. वी.एड्स पर जागरूकता सत्र का आयोजन

हमीरपुर || 21 दिसंबर 2024 || आज मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रवीण चौधरी की अध्यक्षता में डा. राधा कृष्णन गवरमेंट मेडिकल कालेज  हमीरपुर में एच.आई. वी. एड्स पर जागरूकता सत्र का आयोजन किया। इस अवसर पर ज़िला कार्यक्रम अधिकारी डा. सुनील वर्मा, मेडिकल कालेज हमीरपुर के प्रधानाचार्य डा. रमेश भारती  व डा. अभिलाश सूद भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रवीण चौधरी द्वारा मेडिकल कालेज हमीरपुर के प्रशिक्षु डाक्टरों को एच. आई. वी.एड्स के बारे में जागरूक किया गया। उन्होंने बताया की राज्य में सबसे पहला एच.आई.वी. का केस जिला हमीरपुर में आया और बताया की जो एच.आई.वी संक्रमित है वह समय रहते दवाई शुरू कर लेता है तो वह अपना जीवन एक आम आदमी की तरह जी सकता है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रवीण चौधरी ने कहा की इससे बचने के लिए इसके कारणों को जानना बहुत जरूरी है और व्यवहार को बदलने की आवश्यकता है। गर्भावस्था में एच.आई. वी. परीक्षण करवाना बहुत जरूरी है, यदि गर्भवती महिला को एच. आई. वी. है तो प्रारंभिक निदान में ही गर्भवती महिला और उसके बच्चे को फायदा होता है ताकि उन्हें सही इलाज मिल सके। उन्होंने बताया की अब उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर गर्भवती महिला की एच. आई. वी. का टेस्ट हो जाता है और मातृ एवम शिशु सुरक्षा कार्ड पर गर्भवती महिला का एच. आई. वी की स्थिति का उल्लेख होता है।

इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी डा. सुनील वर्मा द्वारा बताया की एच.आई.वी एक वायरस है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचाता है और एड्स एक ऐसी बीमारी है जो एच्. आई. वी.  से पीड़ित लोगों में विकसित हो सकती है। इसके आलावा उन्होंने यौन संचारित संक्रमण के बारे में भी जानकारी दी  तथा एच्. आई. वी. /एड्स (एक्ट)  अधिनियम के बारे में भी बताया की इस अधिनियम का उद्देश्य एच्. आई. वी. के शिकार और इससे प्रभावित लोगों को सुरक्षा प्रदान करना है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन ने भारत को एड्स मुक्त बनाने के लिए 95:95:95 की रणनीति बनाई है जिसके मुताबिक पहले 95 का अर्थ देश में एच.आई. वी संक्रमित लोगों की अनुमानित संख्या के 95 फीसदी लोगों को उनके एच्. आई.वी. स्टेटस की जानकारी होना, दुसरे 95 का अर्थ 95 फीसदी पॉजिटिव एआरटी केन्द्रों पर सतत उपचार होना चाहिए और तीसरा वायरल लोड कम होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा  की  हेपेटाइटिस –बी,  एच आई.वी, की बीमारी से ज्यादा संक्रामक  है सभी को अपना हेपेटाइटिस –बी का  टीकाकरण भी करवाना चाहिए और कहा की 2025- 26 तक  वार्षिक नये एच आई वी संक्रमण को कम करना है और 2030 तक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में एड्स महामारी को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके आलावा उन्होंने पोस्ट- एक्सपोजर  प्रोफिलैक्सिस  (PEP) के बारे में भी बताया की यह एक दवाई है जो एच आई वी  के संपर्क में आने के बाद लिया जाता है  जिसे  एच आई वी के संभावित संपर्क के बाद 72 घंटों के अंदर शुरू करना चाहिए।

इस अवसर पर कालेज प्रधानाचार्य डा. रमेश भारती ने भी अपने विचार रखे। स्वास्थ्य विभाग से बी० सी० सी०समन्यक सलोचना तथा राजेन्द्र भी उपस्थित रहे।

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