शिमला || 21 जुलाई 2025 || शिमला में भाजपा के नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने एक प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश की कांग्रेस सरकार की आपदा प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंताओं का इजहार किया। उन्होंने कहा कि मंडी में आई आपदा के संदर्भ में सरकार संवेदनशील नहीं है और वर्तमान में संवेदनशीलता और गंभीरता की कमी के कारण जनता त्रासदी का सामना कर रही है।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि एक योग्य अधिशासी अभियंता, जो कार्य में अच्छा प्रदर्शन कर रहा था, को कुछ नेताओं के दबाव में ट्रांसफर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मंडी जिला में अब तक कोई वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। मुख्यमंत्री के 9 दिन बाद त्रासदी ग्रस्त क्षेत्रों में जाकर केवल 1 करोड़ रुपये की घोषणा करने को उन्होंने आंशिक और असंतोषजनक बताया, जबकि वास्तविक नुकसान 500 करोड़ का है।
उन्होंने खासकर मुख्यमंत्री की स्पेशल पैकेज की घोषणा न करने पर सवाल उठाया। जयराम ठाकुर ने कहा कि एक घर के क्षतिग्रस्त होने पर सरकार 7 लाख रुपये की घोषणा करती है, लेकिन इसमें से केवल 4 लाख प्रदेश को देना पड़ता है और 3 लाख केंद्र सरकार देती है, जबकि इस संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि फौरी राहत फंड के तहत 2500 रुपये की सहायता दी गई है, जो कि नाकाफी है। उन्होंने बताया कि भारतीय जनता पार्टी और सामाजिक संस्थाओं द्वारा 7 करोड़ रुपये से अधिक की आपदा सहायता उपलब्ध कराई गई है।
जयराम ठाकुर ने यह भी कहा कि त्रासदी उनके क्षेत्र में आई है, इसलिए सरकार मदद में कमी कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि शिमला में भारी बारिश से नुकसान हुआ है, तो क्या सरकार राजधानी को ही बदलने का विचार कर रही है।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह केवल जेसीबी और मशीनों की गिनती कर रही है, जबकि राहत कार्य के लिए जरूरी मशीनरी क्षेत्र में नहीं भेजी जा रही है।
आखिर में, जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री को नसीहत दी कि उन्हें त्रासदी के समय राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास नहीं करना चाहिए और उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से 20 दिन से मंडी में ही हैं और वहां की तबाही का दर्द समझते हैं। उन्होंने राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की गैर-जिम्मेदार टिप्पणियों की भी निंदा की और कहा कि मुख्यमंत्री को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए।